History Of Birthday Cake | हर साल जन्मदिन आता है, केक कटता है, मोमबत्तियां जलती हैं और सब ताली बजाते हैं। आज लगभग सारी दुनिया में यह रस्म निभाई जाती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये परंपरा कहां से शुरू हुई? दरअसल, ये कहानी हजारों साल पुरानी है और इसमें जमकर जश्न मानाया जाता था। दरअसल, प्राचीन मिस्र के लोगों ने सबसे पहले जन्मदिन मनाने की परंपरा शुरू की थी। वे मानते थे कि फराओ जब राजा बनते थे, तो वे देवता बन जाते थे। उनकी ताजपोशी का दिन ही उनका असली 'जन्म' माना जाता था। उस दिन दावतें होती थीं, गाने-बजाने होते थे, लेकिन केक जैसा कुछ नहीं था। फिर भी यहीं से जन्मदिन की खुशी मनाने का सफर शुरू हुआ।
धीरे-धीरे जन्मदिन मनाने की यह परंपरा प्राचीन ग्रीस पहुंची, और फिर इसमें मीठे की एंट्री हुई। ग्रीक लोग चांद की देवी आर्टेमिस को खुश करने के लिए गोल चांद जैसी मिठाई बनाने थे। ये मिठाई शहद और मेवों से बनती थी और इसके ऊपर जलती मोमबत्तियां लगाई जाती थी ताकि थे, ताकि केक चांद की तरह चमके। माना जाता था कि मोमबत्तियों का धुआं आसमान में जाता और इस तरह देवी तक उनकी प्रार्थनाएं पहुंच जाती थीं। यहीं से जन्मदिन की मोमबत्तियों और केक की परंपरा शुरू हुई। ग्रीस के लोगों की परंपरा को रोमनों ने भी इसे अपनाया। वे पुरुषों के 50वें जन्मदिन पर खास केक बनाते थे, जिसमें आटा, नट्स, शहद और ऑलिव ऑयल होता था।
हैरान करने वाली बात यह है कि महिलाओं के जन्मदिन तो 12वीं सदी तक मनाए ही नहीं जाते थे। कई सदियों तक केक अमीरों का शौक बना रहा, क्योंकि चीनी, आटा और अन्य चीजें बहुत महंगी थीं, लेकिन औद्योगिक क्रांति ने सब बदल दिया। 18वीं सदी में मशीनों से उत्पादन बढ़ा, टिन के बर्तन आए और खाने-पीने की चीजें सस्ती होती गई। जर्मनी में 'किंडरफेस्ट' नाम की परंपरा शुरू हुई, जहां बच्चों के जन्मदिन पर सुबह से शाम तक मोमबत्तियां जलती रहतीं। शाम को बच्चा सारी मोमबत्तियां एक सांस में बुझाता और मन में इच्छा मांगता। मोमबत्ती का धुआं इच्छा को देवताओं तक ले जाता, ऐसा मान्यता थी।
आज ये परंपरा पूरी दुनिया में फैल चुकी है। हर जन्मदिन पर केक काटा जाता है, मोमबत्तियां बुझाई जाती हैं। हालांकि अलग-अलग देशों में जन्मदिन मनाने के तरीके में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन यह एक हकीकत है कि लोग आज जन्मदिन को उत्सव की तरह लेते हैं। जन्मदिन पर काटा जाने वाला केक अब सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि खुशियों का प्रतीक बन गया हो। शहद और मेवों से शुरू हुआ केक का सफर आज चॉकलेट, वनीला और फ्रूट केक समेत तमाम फ्लेवर्स तक पहुंच चुका है। इस तरह जन्मदिन मनाने की परंपरा इजिप्ट से, और केक खाने की परंपरा ग्रीस से शुरू हुई थी।
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