हकीमपुर: पश्चिम बंगाल के हकीमपुर में इंटरनेशनल बॉर्डर के जरिए बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों के अपने वतन लौटने का मामला सियासी जुबानी जंग का मुद्दा बन गया है, जिससे विधानसभा चुनाव 2026 से कुछ महीने पहले वोटर लिस्ट को सुधारने की चुनाव आयोग की एसआईआर मुहिम और घुसपैठ को लेकर बीजेपी-तृणमूल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए। हालांकि, शुरुआत में घुसपैठियों के बांग्लादेश लौटने को बहुत ज्यादा तवज्जो नहीं दी गई थी, लेकिन अब ये पॉलिटिकल मु्द्दा बन गया है, जिसने सीमा चौकी को ‘‘वैचारिक युद्धक्षेत्र’’ में बदल दिया। दरअसल, उत्तर 24 परगना के बनगांव में भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर, लोकल लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के शुरू होने के बाद बिना दस्तावेज वाले बांग्लादेशियों के वापस लौटने की कोशिशों में बढ़ोतरी हुई है।
कितने घुसपैठिए रोज कर रहे वतन वापसी?
बीएसएफ अधिकारियों के मुताबिक, एसआईआर के कारण हर रोज लगभग 150-200 बांग्लादेशी लौट रहे हैं, और 20 नवंबर तक करीब 1,700 लोग बॉर्डर पार कर चुके हैं। बीजेपी का कहना है कि अपने छोटे-छोटे बैग और बच्चों को लिए जीरो लाइन की तरफ बढ़ते लोगों की फोटोज पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ के उसके दावे को सही साबित करती हैं।
पश्चिम बंगाल बीजेपी चीफ का बड़ा दावा
इसको लेकर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि हम यही तो कह रहे हैं, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ने घुसपैठियों को हिला दिया है। सच्चाई आखिरकार सामने आई है। लोग इसलिए वापस जा रहे हैं क्योंकि उन्हें पकड़े जाने का डर है।
तृणमूल कांग्रेस ने SIR को बताया साजिश
वहीं, पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने एसआईआर को एक साजिश करार दिया, जिसका मकसद ‘‘जबरन और राजनीति से प्रेरित’’ मुहिम को वैध बनाना है। टीएमसी के एक सांसद ने दावा किया कि हकीमपुर में कुछ भी स्वाभाविक नहीं है।
(इनपुट- भाषा)
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