पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी की अगुआई वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने गुरुवार को लक्ष्मी भंडार योजना में 500 रुपये की मासिक वृद्धि की घोषणा की। इसके साथ ही गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करने के लिए एक नए पोर्टल का प्रस्ताव रखा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री बनर्जी ने कहा, “हम सौ दिन रोजगार योजना, आवास योजना जैसी कई योजनाओं में नंबर एक पर हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के लिए धन देना बंद कर दिया। हम यह बजट जनता के लिए पेश कर रहे हैं, चुनाव के लिए नहीं। हमने अपना वादा निभाया है। इसलिए, हमने इस फरवरी से लक्ष्मी भंडार में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की है। गिग वर्कर्स के लिए, हम एक पोर्टल बनाएंगे जहां वे लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकेंगे।”
टीएमसी ने बंगाल के बजट के बारे में बताया
एक्स पर एक पोस्ट में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने लिखा, "बड़ी घोषणा! वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने बजट वक्तव्य में, हमारी वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत वित्तीय सहायता में 500 रुपये की वृद्धि की घोषणा की है। ममता के नेतृत्व में, हम महिलाओं को गरिमापूर्ण और स्वतंत्र जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने वित्त वर्ष 2026-27 के अंतरिम राज्य बजट की प्रमुख विशेषताओं के बारे में बताया। इसमें सभी क्षेत्रों में कल्याणकारी उपायों को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सैलरी भी बढ़ेगी
लक्ष्मी भंडार योजना के तहत, महिला लाभार्थियों को अब फरवरी 2026 से प्रति माह अतिरिक्त 500 रुपये प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री बनर्जी ने अस्थायी और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के लिए भी अतिरिक्त लाभों की घोषणा की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी सहायकों, आशा कार्यकर्ताओं, आईसीडीएस कार्यकर्ताओं, साथ ही नागरिक स्वयंसेवकों, ग्राम पुलिस और हरित पुलिस कर्मियों के मासिक वेतन में अप्रैल 2026 से 1,000 रुपये की वृद्धि होगी। इसके अतिरिक्त, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायकों को 60 वर्ष की आयु से पहले मृत्यु होने की स्थिति में 5 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा मिलेगा।
क्या है लक्ष्मी भंडार योजना?
यह योजना फरवरी 2021 में ममता बनर्जी सरकार द्वारा लॉन्च की गई। इसका उद्देश्य राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मासिक वित्तीय सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारना और वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करना है। पश्चिम बंगाल की स्थायी निवासी महिलाएं, जिनकी उम्र 25 से 60 साल के बीच है और वह आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। वह इस योजना का लाभ ले सकती हैं। लगभग 2.42 करोड़ महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है। योजना की शुरुआत में सामान्य/अन्य वर्ग की महिलाओं को हर महीने 1000 और एससी/एसटी वर्ग की महिलाओं को 1200 रुपये मिलते थे। अब सामान्य वर्ग को 1500 और एससी-एसटी महिलाओं को 1700 रुपये मिलेंगे।
छह चुनावों में सफल रहा यह फॉर्मूला
विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को लुभाने वाली योजनाएं जीत की गारंटी देती हैं। पिछले दो साल में 6 चुनाव इसका प्रमाण देते हैं। मध्य प्रदेश में साल 2023 चुनाव से पहले लाडली बहन योजना शुरू की गई और 2018 में हारने वाली बीजेपी भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई। इसके बाद महाराष्ट्र में लाडकी बहीण योजना, छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना, बिहार में महिला रोजगार योजना और ओडिशा में सुभद्रा योजना ने बीजेपी को जीत दिलाई। इन सभी योजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के बैंक खाते में सीधे पैसे भेजे जाते हैं। वहीं, 2024 में झारखंड में जेएमएम ने हर महीने पैसे देने वाली योजना शुरू कर बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।
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