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पाकिस्तान में तोड़े गए हिंदू मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें क्या कहा

‘डॉन’ अखबार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हमले का संज्ञान लिया था और स्थानीय अधिकारियों को 5 जनवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि पाकिस्तान में ऐसे सभी मंदिरों और गुरुद्वारों का ब्यौरा अदालत को सौंपे जो चालू या बंद हैं।

IndiaTV Hindi Desk IndiaTV Hindi Desk
Updated on: January 06, 2021 16:13 IST
Pakistan Supreme Court orders EPTB to start reconstruction of damaged Hindu shrine in Karak- India TV Hindi
Image Source : @SALMANCHAUDARYY ‘डॉन’ अखबार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हमले का संज्ञान लिया था और स्थानीय अधिकारियों को 5 जनवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे।

इस्लामाबाद: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुछ स्थानीय मौलवियों और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के समर्थकों की अगुवाई में भीड़ के जरिए एक हिंदू मंदिर में की गई तोड़फोड़ के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया। कोर्ट ने मंगलवार को ‘इवैक्यू प्रॉपर्टी ट्रस्ट बोर्ड’ (ईपीटीबी) को यह आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस हमले से देश को 'अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी' उठानी पड़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगा सभी मंदिरों और गुरुद्वारों का ब्यौरा

‘डॉन’ अखबार के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने हमले का संज्ञान लिया था और स्थानीय अधिकारियों को 5 जनवरी को अदालत में पेश होने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि पाकिस्तान में ऐसे सभी मंदिरों और गुरुद्वारों का ब्यौरा अदालत को सौंपे जो चालू या बंद हैं। कोर्ट ने दो हफ्ते में मंदिर बनाने और इसके लिए तोड़फोड़ करने वालों से वसूली का आदेश दिया है।

अब तक 100 से ज्यादा आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
बता दें कि खैबर पख्तूनख्वा में करक जिले के टेरी गांव में कुछ लोगों ने पिछले बुधवार को मंदिर के विस्तार कार्य के विरोध में उसमें तोड़फोड़ की थी और आग लगा दी थी। इस घटना के सिलसिले में दर्ज की गई प्राथमिकी में 350 से अधिक लोग नामजद हैं। इस मामले में अब तक 100 से ज्यादा आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

हिंदू धार्मिक नेता की थी समाधि
इस मंदिर में एक हिंदू धार्मिक नेता की समाधि थी। मंदिर की दशकों पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार के लिए हिंदू समुदाय ने स्थानीय अधिकारियों से अनुमति ली थी। कुछ स्थानीय मौलवियों और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के समर्थकों की अगुवाई में भीड़ ने पुराने ढांचे के साथ-साथ नए निर्माण कार्य को ध्वस्त कर दिया था।

भारत ने भी दर्ज कराया पाकिस्तान के समक्ष विरोध
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के नेताओं ने मंदिर पर हमले की कड़ी निंदा की थी। भारत ने भी मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को लेकर पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया और इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग की। सूत्रों ने नई दिल्ली में शुक्रवार को बताया था कि राजनयिक माध्यम से पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया है।

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