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Bangladesh News: 1971 बांग्लादेश युद्ध अपराधों को लेकर ‘रज़ाकार बाहिनी’ के छह सदस्यों को फांसी की सजा

 Edited By: Pankaj Yadav
 Published : Jul 28, 2022 06:21 pm IST,  Updated : Jul 28, 2022 06:21 pm IST

Bangladesh News: साल 1971 में हुए बांग्लादेश युद्ध के दौरान एक गांव में हुए जनसंहार में पाकिस्तानी फौज का साथ देने वाले कुख्यात अर्द्धसैनिक बल ‘रज़ाकर बाहिनी’’ के छह सदस्यों को मौत की सजा सुनाई गई।

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Highlights

  • 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी फौज की मदद की थी
  • बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण ने सुनाई मौत की सजा
  • युद्ध के दौरान एक गांव में हुए नरसंहार में पाकिस्तानी फौज का साथ दिया था

Bangladesh News: बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध अधिकरण ने कुख्यात अर्द्धसैनिक बल ‘रज़ाकर बाहिनी’’ के छह सदस्यों को 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी फौज की ‘मनवता के विरूद्ध अपराध’ में मदद करने के लिए गुरुवार को मौत की सज़ा सुनाई। न्यायमूर्ति मोहम्मद शाही-नूर-इस्लाम की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय अधिकरण ने यह आदेश दिया है। इस्लाम ने कहा कि उन्हें फांसी की सज़ा दी जाती है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान पांच दोषी अधिकरण में मौजूद थे जबकि एक अनुपस्थित था। इन छह दोषियों में अमजद हुसैन होवलदार, सहर अली सरदार, अतियार रहमान, मोताचिन बिल्लाह, कमाल उद्दीन गोल्डर और नाज़-उल-इस्लाम शामिल हैं। उनमें से नाज़-उल-इस्लाम फरार है। जब फैसला सुनाया गया तो दोषी कटघरे में मौजूद थे जिसके बाद उन्हें ढाका केंद्रीय जेल ले जाया गया। 

अपराधियों ने युद्ध के दौरान पाकिस्तानी फौज का साथ दिया था

अभियोजन के वकील मुखलेस-उर-रहमान ने पत्रकारों को बताया, “ सभी छह दोषियों पर मानवता के खिलाफ अपराध के चार आरोप लगाए गए थे।” अधिकरण के अधिकारियों ने कहा कि यह दोषी कुख्यात ‘रज़ाकार बाहिनी’’ के सदस्य थे जो पूर्वी पाकिस्तानी में अर्द्ध सैनिक बल था जो पाकिस्तानी फौज से संबंद्ध था। अधिकरण ने कहा कि सभी दोषी दक्षिण पश्चिम खुलना जिले के रहने वाले हैं और बड़े पैमाने पर हत्याएं, आगज़नी जैसे अत्याचार किए थे। अभियोजन के वकील ने कहा कि वह अधिकरण के फैसले से संतुष्ट हैं जबकि बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि वे अपने मुवक्किलों से सलाह-मशविरे के बाद उच्चतम न्यायालय के शीर्ष अपीलीय डिविज़न में अपील करेंगे। 

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