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Sajith Premadasa: विपक्ष के नेता 'सजित प्रेमदासा' श्रीलंका का अगला राष्ट्रपति बनने को तैयार, संकट से निकालने के लिए पेश करेंगे आर्थिक योजना

 Written By: Shilpa
 Published : Jul 12, 2022 03:19 pm IST,  Updated : Jul 12, 2022 03:28 pm IST

सजित प्रेमदासा 2019 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में हार गए थे। लेकिन अब वो एक बार फिर इस पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें सत्तारूंढ़ गठबंधन के सांसदों के साथ की जरूरत होगी।

Sajith Premadasa- India TV Hindi
Sajith Premadasa Image Source : TWITTER

Highlights

  • सजित प्रेमदासा ने राष्ट्रपति की उम्मीदवारी पेश की
  • प्रेमदासा ने सहयोगी दलों के नेताओं से समर्थन मांगा
  • गोटबाया के इस्तीफे का ऐलान बुधवार को होगा

Sajith Premadasa: श्रीलंका में इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट को लेकर शुरू हुआ बवाल अभी थमा नहीं है। राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों के कब्जे के बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को वहां से भागना पड़ा। वो इस वक्त कहां हैं, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। प्रधानमंत्री के पद से महिंदा राजपक्षे पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। इस बीच देश के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। श्रीलंका की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा का कहना है कि वह देश में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार होंगे। 

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति ने इस्तीफे के लेटर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसका ऐलान संसद बुधवार को करेगी। राजपक्षे खुद भी इससे पहले कह चुके हैं कि वह 13 जुलाई को अपना पद छोड़ देंगे। सजित प्रेमदासा की बात करें, तो उनकी पार्टी समाजी जन बालावेगाया ने अपने सहयोगी दलों से राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन देने को कहा है। बता दें श्रीलंका 1948 में आजाद होने के बाद के अपने सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जिसके कारण देश में ईंधन सहित रोजमर्रा की जरूरत का सामान काफी महंगा हो गया। लोगों को जरूरी दवाएं तक नहीं मिल पा रही हैं।

सरकार की गलत नीतियां हैं जिम्मेदार

देश के वर्तमान संकट के पीछे लोग सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लंबे वक्त से देश पर शासन कर रहा राजपक्षे परिवार आज लोगों के गुस्से का सामना कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राजपक्षे परिवार ने देश हित को परे रख केवल अपने हित में काम किया है। इस सरकार के कार्यकाल के दौरान चीन से खूब कर्ज लिया गया है। यही कारण है कि लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। संकट की शुरुआत में बढ़ते दबाव के कारण लगभग पूरी कैबिनेट ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे और राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अपने पदों पर बने हुए थे। हालांकि बाद में पीएम ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन राष्ट्रपति अब जाकर इस्तीफा देने के लिए राजी हुए हैं।

विदेशी मद्रा भंडार की भारी कमी

विदेशी मुद्रा की कमी और कर्ज अदायही में असक्षम श्रीलंका के विपक्षी पार्टी के नेता सजित प्रेमदासा का कहना है कि उनकी पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने राष्ट्रपति के पद के लिए उनके नाम पर सहमति जताई है। इससे पहले वह 2019 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में हार गए थे। लेकिन अब वो एक बार फिर इस पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि इसके लिए उन्हें सत्तारूंढ़ गठबंधन के सांसदों के साथ की जरूरत होगी। ताकि वो उनका राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव करें। प्रेमदासा को इस बात की पूरी उम्मीद है कि लोगों के गुस्से के चलते उन्हें दोनों तरफ से सांसदों का सहयोग मिलेगा।

55 फीसदी पहुंची महंगाई दर

श्रीलंका के हालात इस वक्त कितने बिगड़ गए हैं, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां जून महीने में महंगाई दर बढ़कर 55 फीसदी पर पहुंच गई है। लाखों लोगों को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रेमदासा का ये भी कहना है कि अगर सर्वदलीय अंतरिम सरकार का गठन होता है, तो वह इसमें शामिल होने को भी तैयार हैं। इससे पहले सजित प्रेमदासा को अप्रैल के महीने में प्रधानमंत्री पद के लिए खड़ा होने को कहा गया था लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिय था। उस वक्त उनके ऐसा किए जाने की खूब आलोचना हुई थी। जिसके बाद उनके प्रतिद्विंद्वी कहे जाने वाले रानिल विक्रमसिंघ इस पद पर आसीन हुए। हालांकि अपने निजी आवास पर हमले के बाद उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया था। 

प्रेमदासा ने बताया क्या है जरूरी

प्रोमदासा का कहना है कि श्रीलंका की वर्तमान स्थिति अनिश्चितता से भरपूर है। उनका कहना है कि इस वक्त सहयोग, सहमति, विचार विमर्श और एक साथ आने की जरूरत है। यहां के स्थानीय मीडिया का कहना है कि देश में केवल 25 करोड़ डॉलर की विदेशी मुद्रा ही बची है। देश में ईंधन की किल्लत अब भी जारी है। लोगों को घंटों की बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि पावर प्लांट्स के लिए ईंधन ही नहीं है। जिसके चलते बहुत से नागरिक देश छोड़ने को मजबूर हो गए हैं।

चार-पांच साल लगेंगे- प्रेमदासा

सजित प्रमेदास का मानना है कि वर्तमान संकट के समाधान के लिए कोई आसान तरीका नहीं बचा है। 2019 के जैसी आर्थिक स्थिति तक पहुंचने के लिए करीब चार से पांच का वक्त लगेगा। उन्होंने ये भी कहा कि संकट से देश को बाहर निकालने के लिए उनकी सरकार के पास आर्थिक योजना है।  उन्होंने बीबीसी से बात करते हुए कहा, 'हम जनता को धोखा नहीं देंगे। पारदर्शी रहेंगे और देश की आर्थिक मुसीबतों के निपटारे के लिए एक ठोस योजना पेश करेंगे।' हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संकट के लिए कोई एक नहीं बल्कि सभी 225 सांसद जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि राजनीति में नए लोगों को लाने की आवश्यकता है।

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