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क्या है चीन का चांद मिशन, जिसके तहत 2030 तक चंद्रमा पर मानवों को भेजने की चल रही तैयारी

चीन अपना बहुप्रतीक्षित मानव मून मिशन को लेकर तेजी से काम कर रहा है। चीन 20230 तक मानवों को चंद्रमा पर उतारना चाहता है।

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Nov 12, 2025 04:57 pm IST, Updated : Nov 12, 2025 04:57 pm IST
चीन का मून मिशन (फाइल)- India TV Hindi
Image Source : AP चीन का मून मिशन (फाइल)

China Moon Mission: मानव ने करीब 50 साल पहले आखिरी बार चंद्रमा पर कदम रखा था। मगर अब चीन धीरे-धीरे अपने अंतरिक्ष यात्रियों को एक बार फिर चंद्रमा की सतह पर उतारने की दिशा में काम कर रहा है। 30 अक्टूबर, 2025 को, चीन के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के एक प्रवक्ता ने कहा कि चीन की 2030 तक चंद्र मिशन शुरू करने की योजना "ट्रैक पर" है। वहीं अमेरिकियों को डर है कि यदि चीन नासा के प्रयास से पहले चंद्रमा पर उतर जाता है, तो अमेरिका की अंतरिक्ष यात्रा राष्ट्र के रूप में दर्जे को नुकसान पहुंच सकता है। 

अमेरिका का मानव मिशन क्या है

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का आर्टेमिस III मिशन 1972 में अपोलो 17 के बाद से चंद्रमा की सतह पर पहले अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों को भेजेगा। यह 2027 में लॉन्च होने वाला है, लेकिन देरी इसे बीजिंग की नियोजित चंद्र उड़ान के बहुत करीब ला सकती है। 

चीन की प्लानिंग क्या है 

चीन के मानव चंद्र मिशन की आगामी तिथि देश के लिए एक उल्लेखनीय प्रक्षेपवक्र का प्रतिनिधित्व करती है। बीजिंग ने 2003 में अपनी पहली अंतरिक्ष यात्री यांग लीवेई को शेंझोउ 5 मिशन पर अंतरिक्ष में भेजा था। चीन की चंद्रमा पर लैंडिंग के लिए दशकों लंबी तैयारी 1960 और 70 के दशक में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच अंतरिक्ष दौड़ की विशेषताओं या "पहली" उपलब्धियों को दर्शाती है। चीन ने अपनी पहली अंतरिक्ष यात्री मिशन से आगे बढ़कर दो अंतरिक्ष यात्रियों को भेजा, उसके बाद तीन सदस्यीय मिशन लॉन्च किया, जिसमें एक चीनी अंतरिक्ष यात्री का पहला अंतरिक्ष भ्रमण शामिल था। उसके बाद देश ने पृथ्वी की निचली कक्षा में तियानगोंग अंतरिक्ष स्टेशन बनाया। जब 2030 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन सेवानिवृत्त हो जाएगा, तो यह चीन को पृथ्वी कक्षा में स्थायी चौकी वाला एकमात्र देश बना देगा। 

चीन का अंतरिक्ष में कमाल

31 अक्टूबर को चीन की शेंझोउ-21 उड़ान ने तीन चालक दल के सदस्यों को तियानगोंग कक्षीय चौकी पर भेजा। उन्होंने अप्रैल 2025 से अंतरिक्ष स्टेशन पर रह रहे तीन अन्य चीनी अंतरिक्ष यात्रियों से संचालन संभाला। ऐसी चालक दल की अदला-बदली अब चीन के लिए सामान्य हो गई है और यह चंद्र मिशन की तैयारी करते हुए देश की प्रभावशाली क्षमताओं को और प्रदर्शित करती है। हालांकि तीनों अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी पर वापसी में देरी हुई है, क्योंकि उनके कैप्सूल पर अंतरिक्ष कचरे से टक्कर लगी। यह एक याद दिलाता है कि अंतरिक्ष एक शत्रुतापूर्ण वातावरण है, चाहे मिशन कितने ही सामान्य क्यों न लगें। चीन ने जिस तरह से अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति को धीरे-धीरे मजबूत किया है, वह इसकी तकनीकी क्षमता को उजागर करता है। 1970 के दशक से, चीन ने लॉन्ग मार्च रॉकेट परिवार के 20 से अधिक प्रकार विकसित किए हैं -जिनमें से 16 आज सक्रिय हैं। 

97 फीसदी है सफलता दर

चीन की रॉकेटों की सफलता दर 97% है। यह स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट की 99.46% सफलता दर से थोड़ा कम है। अपने विश्वसनीय लॉन्चरों के साथ, चीन ने अपनी अंतरिक्ष मील के पत्थरों के लिए सटीक योजना औ यथार्थवादी समयसीमाएं बनाने में सक्षम हो सका है। इस वर्ष अगस्त में, चीन ने अपने नवीनतम लॉंग मार्च 10 मॉडल का ग्राउंड टेस्ट किया। यह मॉडल 2030 में अगली पीढ़ी के मेंगझोउ चालक दल कैप्सूल पर सवार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के लिए बनाया गया है। यह शेंझोउ अंतरिक्ष यान ेेेेेेको बदल देगा, जो अब तक मानव मिशनों का मुख्य वाहन रहा है। (द कनवर्शेसन- एपी)

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