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तिरुप्परनकुंड्रम विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, दरगाह में रोज़ाना नमाज़ की अनुमति नहीं

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Niraj Kumar
 Published : Feb 09, 2026 02:22 pm IST,  Updated : Feb 09, 2026 02:22 pm IST

देश की शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ियों पर मौजूद सिकंदर बदुशा औलिया दरगाह परिसर में मुसलमानों को केवल रमज़ान और बकरीद के अवसर पर ही नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई है।

Supreme Court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : INDIA TV

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें तमिलनाडु के मदुरै ज़िले स्थित तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ियों पर मौजूद सिकंदर बदुशा औलिया दरगाह परिसर में मुसलमानों को केवल रमज़ान और बकरीद के अवसर पर ही नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी गई है। कोर्ट ने दरगाह परिसर में पशु बलि पर लगे प्रतिबंध को भी कायम रखा है।

यह आदेश मद्रास हाईकोर्ट के अक्टूबर 2025 के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। याचिका दरगाह के उपासक एम. इमाम हुसैन ने दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले शामिल थे, ने हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए इसे संतुलित आदेश बताया।

रमज़ान और बकरीद पर ही पढ़ सकते हैं नमाज

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि नेल्लीतोप्पु क्षेत्र की 33 सेंट ज़मीन, जो दरगाह के स्वामित्व में है, वहां मुसलमानों को रमज़ान और बकरीद के अलावा किसी अन्य दिन नमाज़ पढ़ने का अधिकार नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इलाके में कभी भी कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रही है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह स्वीकार किया है कि संबंधित भूमि मुसलमानों की है, इसके बावजूद नमाज़ को केवल रमज़ान और बकरीद तक सीमित कर दिया गया है, जिससे वे असहमत हैं।

बता दें कि पिछले साल दिसंबर महीने में मद्रास हाईकोर्ट ने दरगाह के पास स्थित दीपथून में दीप जलाने की इजाजत दी जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। हाईकोर्ट ने आदेश न करने पर और कानून-व्यवस्था का हवाला देने पर राज्य सरकार को भी कड़ी फटकार लगाई।

क्या है विवाद? 

तमिलनाडु के मदुरै जिले में स्थित तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी को लेकर चल रहा विवाद मुख्य रूप से धार्मिक अधिकारों, ऐतिहासिक दावों और वहां स्थित एक मंदिर व दरगाह के बीच की सीमाओं से जुड़ा है। यह पहाड़ी हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए पवित्र मानी जाती है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इस इस पहाड़ी पर भगवान मुरुगन का छठा निवास स्थान (सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर) स्थित है, जो 8वीं शताब्दी का है। साथ ही पहाड़ी की चोटी पर काशी विश्वनाथ मंदिर और उची पिल्लैयार मंदिर भी हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि इस पहाड़ी पर 14वीं-17वीं शताब्दी की हजरत सुल्तान सिकंदर बदुशा औलिया दरगाह स्थित है। मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है।

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