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ट्रंप की इस बात पर खफा हुईं मेलोनी! सोशल मीडिया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट करके सुनाई खरी-खरी

Meloni Vs Trump: मेलोनी को डोनाल्ड ट्रंप का अफगानिस्तान पर NATO के सहयोगियों को लेकर बयान पसंद नहीं आया है। इसपर उन्होंने सोशल मीडया पर लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर जवाब दिया है।

Edited By: Vinay Trivedi
Published : Jan 25, 2026 12:36 pm IST, Updated : Jan 25, 2026 12:36 pm IST
meloni vs trump- India TV Hindi
Image Source : AP मेलोनी ने ट्रंप के NATO सहयोगियों को लेकर दिए बयान को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

रोम: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अफगानिस्तान में NATO सहयोगियों के फ्रंटलाइन पर ना रहने की बात पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी खफा हो गई हैं। इसके जवाब में मेलोनी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'इटली की सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की उन बातों को सुनकर गहरा आश्चर्य हुआ, जिनमें उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में ऑपरेशन के दौरान NATO के सहयोगी देश पीछे रह गए थे। 11 सितंबर 2001 के टेररिस्ट अटैक के बाद, NATO ने अपनी हिस्ट्री में पहली और अब तक की एकमात्र बार आर्टिकल 5 को एक्टिवेट किया था जो अमेरिका के प्रति एक असाधारण एकजुटता का प्रतीक था।'

अफगानिस्तान में शहीद हुए इटली के 53 सैनिक

उन्होंने आगे लिखा, 'टेररिज्म को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ चलाए गए इस बड़े ऑपरेशन में इटली ने अपने साथी देशों के साथ तुरंत रिएक्ट किया। इटली ने हजारों सैनिक वहां तैनात किए। रीजनल कमांड वेस्ट की जिम्मेदारी संभाली, जो पूरी इंटरनेशनल मिशन के सबसे अहम क्षेत्रों में से एक था। करीब 20 वर्षों तक चले इस ऑपरेशन के दौरान, हमारे देश ने ऐसी कीमत चुकाई जिसको लेकर कोई विवाद नहीं हो सकता। इसमें इटली के 53 सैनिक शहीद हुए और 700 से ज्यादा घायल भी हुए, जो युद्ध अभियानों, सुरक्षा मिशनों और अफगान बलों की ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल थे।'

meloni statement

Image Source : AP
मेलोनी ने ट्रंप को कड़े शब्दों में जवाब दिया है।

NATO में कम योगदान की बात स्वीकार नहीं

मेलोनी ने लिखा, 'इसी वजह से अफगानिस्तान में NATO देशों के योगदान को कम करके आंकने वाले बयान स्वीकार नहीं कर सकते, खासतौर पर तब जब वे किसी सहयोगी देश की तरफ से आए हों। इटली और अमेरिका के बीच मजबूत दोस्ती है, जो ऐतिहासिक सहयोग और साझा मूल्यों पर बेस्ड है। मौजूदा तमाम चुनौतियों के दौर में यह और भी ज्यादा जरूरी है। लेकिन इस दोस्ती के लिए आपसी सम्मान जरूरी है, जो NATO की एकजुटता को बनाए रखने की आवश्यक है।'

ट्रंप ने NATO सहयोगियों पर ऐसा क्या कहा था?

गौरतलब है कि ट्रंप ने दावोस में कहा था कि मुझे विश्वास नहीं है कि NATO के सहयोगी देश तब मदद के लिए मौजूद रहे होंगे जब अमेरिका को उनकी जरूरत पड़ी। हमें कभी भी उनकी जरूरत नहीं पड़ी, उनसे हमने कभी भी कुछ नहीं मांगा। वे दावा करते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान में अपने कुछ सैनिक भेजे थे, लेकिन वे मोर्चे से थोड़ा दूर रहे, फ्रंटलाइन पर नहीं रहे। ट्रंप के इसी बयान से यूरोप के तमाम नेता नाराज हैं। मेलोनी के अलावा, इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भी बयान दे चुके हैं।

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