Sunday, January 25, 2026
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बिना दर्द के भी हो सकता है हर्निया, एक्सपर्ट से जानें क्या हैं लक्षण और समय रहते कैसे करें बचाव?

हर्निया केवल दर्द से जुड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि बिना दर्द के भी शरीर में चुपचाप विकसित हो सकती है। इसलिए लक्षणों की पहचान, समय पर जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेकर इलाज कराना ही गंभीर जोखिम से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

Written By: Poonam Yadav @R154Poonam
Published : Jan 25, 2026 06:30 am IST, Updated : Jan 25, 2026 06:30 am IST
हर्निया- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK हर्निया

हर्निया को आमतौर पर लोग तेज़ दर्द से जोड़कर देखते हैं, जबकि कई मामलों में यह बिना किसी दर्द के भी हो सकता है। कानपुर में स्थित अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, डॉ. वैभव गुप्ता, कहते हैं कि दरअसल हर्निया तब होता है, जब पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और आंत या फैटी टिशू उस कमजोर हिस्से से बाहर की ओर उभरने लगते हैं। शुरुआती स्टेज में यह समस्या अक्सर दर्दरहित होती है, इसलिए मरीज इसे गंभीरता से नहीं लेता और इलाज में देरी हो जाती है।

बिना दर्द वाले हर्निया के लक्षण

बिना दर्द वाला हर्निया आमतौर पर धीरे-धीरे विकसित होता है और इसके शुरुआती संकेत इतने हल्के होते हैं कि मरीज अक्सर उन्हें नजरअंदाज कर देता है। खड़े होने, खांसने, छींकने या भारी वजन उठाने पर पेट, नाभि या जांघ के पास हल्का उभार दिखाई देना इसका सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है, जो कई बार लेटने पर अपने आप अंदर चला जाता है। इसके साथ पेट में भारीपन, खिंचाव, लंबे समय तक खड़े रहने पर असहजता, गैस बनना, कब्ज रहना या बार-बार पेट फूलने जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं।

किन लोगों में होता है अधिक खतरा

हर्निया का खतरा विशेष रूप से उन लोगों में अधिक होता है, जिनकी पेट की मांसपेशियां कमजोर होती हैं। मोटापा, बढ़ती उम्र, बार-बार भारी सामान उठाना, लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी, कब्ज के दौरान अधिक जोर लगाना, गर्भावस्था, प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं और पेट की पुरानी सर्जरी इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं। आमतौर पर पुरुषों में जांघ के पास और महिलाओं में नाभि के आसपास हर्निया की समस्या अधिक देखने को मिलती है, इसलिए इन लक्षणों को समय रहते पहचानना और चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी होता है।

कब बनता है हर्निया खतरनाक?

अगर बिना दर्द वाला हर्निया अचानक तेज़ दर्द, सूजन, उल्टी, बुखार या उभार के सख्त और वापस अंदर न जाने जैसे लक्षणों के साथ सामने आए, तो यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसे स्ट्रैंगुलेटेड हर्निया कहा जाता है, जिसमें आंतों की ब्लड सप्लाई रुकने का गंभीर खतरा रहता है और यह एक मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है, जिसमें तुरंत इलाज आवश्यक होता है।

समय रहते इलाज है जरूरी

हर्निया अपने आप ठीक नहीं होता बल्कि धीरे-धीरे बढ़ता है इसलिए समय रहते बचाव जरूरी है। किसी भी असामान्य उभार या लंबे समय से बनी परेशानी को नजरअंदाज करने से जटिलताएं बढ़ सकती हैं, जबकि शुरुआती जांच और सही समय पर इलाज कराने से न केवल गंभीर जोखिम से बचा जा सकता है, बल्कि सर्जरी भी अपेक्षाकृत सरल और सुरक्षित हो जाती है।

हर्निया से बचाव के उपाय

वजन को नियंत्रित रखना, फाइबर युक्त आहार लेना ताकि कब्ज न हो, भारी सामान उठाते समय सही तरीका अपनाना, धूम्रपान से बचना, खांसी और पेट से जुड़ी बीमारियों का समय पर इलाज कराना तथा पेट की मांसपेशियों को मजबूत रखने वाले हल्के व्यायाम करना हर्निया से बचाव में मददगार होते हैं। 

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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