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युद्ध शुरू होने के 3 साल बाद इस्तांबुल में होगा रूस-यूक्रेन का आमना-सामना, शांति वार्ता पर होगा मंथन

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : May 16, 2025 03:42 pm IST,  Updated : May 16, 2025 03:46 pm IST

यूक्रेन और रूस के बीच इस्तांबुल में 3 साल बाद आमना-सामना होने जा रहा है। दोनों देशों के नेता लंबे समय बाद एक दूसरे से रूबरू होकर शांति वार्ता करेंगे।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन। - India TV Hindi
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की और रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमिर पुतिन। Image Source : AP

इस्तांबुल: तीन वर्षों के लंबे युद्धकाल के बाद, रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल पहली बार प्रत्यक्ष शांति वार्ता के लिए शुक्रवार को तुर्किये के इस्तांबुल में मिलेंगे। यह वार्ता तुर्किये की मध्यस्थता में हो रही है, लेकिन जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि इस बैठक से युद्ध समाप्ति की दिशा में तत्काल किसी ठोस परिणाम की उम्मीद कम है।

यूक्रेन की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व रक्षा मंत्री रुस्तेम उमेरोव करेंगे, जबकि रूस की तरफ से वार्ता का नेतृत्व राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सहयोगी व्लादिमीर मेदिंस्की कर रहे हैं। इस बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें टिकी हुई हैं, हालांकि वास्तविक समाधान की संभावनाओं पर अभी भी संदेह बना हुआ है।

पुतिन ने ठुकराई ज़ेलेंस्की से मुलाकात की पेशकश

वार्ता से ठीक पहले शांति प्रयासों को उस वक्त झटका लगा जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की के साथ आमने-सामने बैठक का प्रस्ताव स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी बैठक की संभावनाएं पहले से ही बहुत कम थीं।

युद्धविराम पर असहमति

अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा प्रस्तावित 30-दिवसीय पूर्ण युद्धविराम योजना को यूक्रेन ने सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया है। लेकिन पुतिन ने इस प्रस्ताव पर कठोर और दूरगामी शर्तें जोड़कर इसे अस्वीकार कर दिया है, जिससे वार्ता की सफलता की संभावना और कम हो गई है।

क्या है रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि 

गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से युद्ध जारी है, जिसमें हजारों नागरिकों और सैनिकों की जान जा चुकी है, और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। अब तक की अधिकांश वार्ताएं ऑनलाइन या तीसरे पक्ष के माध्यम से हुई हैं। यह पहली बार है कि दोनों देश सीधे आमने-सामने बैठकर बातचीत करने जा रहे हैं। इस्तांबुल में होने वाली यह वार्ता भले ही तत्काल संघर्षविराम या युद्ध समाप्ति की ओर न ले जाए, लेकिन इसे एक राजनयिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में स्थायी समाधान की नींव रखी जा सकती है (एपी)

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