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अफ्रीका और सीरिया की अस्थिरता के बीच ISIS के आतंकियों के हैरतअंगेज कारनामे, वारदातों में कर रहे AI का इस्तेमाल

 Published : Aug 21, 2025 11:13 am IST,  Updated : Aug 21, 2025 11:33 am IST

अफ्रीका और सीरिया में अस्थिरता के फायदा उठाकर इस्लामिक स्टेट के आतंकी अपनी सामूहिक गतिविधियों को बढ़ाने के साथ अपग्रेड भी कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र (फाइल)- India TV Hindi
संयुक्त राष्ट्र (फाइल) Image Source : AP

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी विशेषज्ञों ने इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के आतंकियों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। यूएन ने रिपोर्ट में कहा है कि आईएसआईएस के चरमपंथी अफ्रीका, सीरिया और अफगानिस्तान में गंभीर अस्थिरता का फायदा उठा रहे हैं। वह आधुनिक तकनीकों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर अपनी सामूहिक गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं।

UN ने जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में इराक में हार के बावजूद आईएस के ‘स्लीपर सेल’ अभी भी सीरिया और इराक में सक्रिय हैं और दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसके समर्थक मौजूद हैं। यूएन ने आईएस आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है।

अफ्रीका में आईएस गतिविधियां फिर बढ़ीं

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी कार्यालय प्रमुख व्लादिमीर वोरोनकोव ने कहा कि साहेल क्षेत्र (बुर्किना फासो, माली, नाइजर) में इस्लामिक स्टेट की गतिविधियों में हाल में वृद्धि देखी गई है। पश्चिम अफ्रीका में यह संगठन अब “आतंकवाद का बड़ा प्रचारक” बन गया है और विदेशी आतंकवादियों को आकर्षित कर रहा है।

लीबिया तक फैला आईएस का नेटवर्क

लीबिया में हुई गिरफ्तारियों से इस क्षेत्र में आईएस नेटवर्क के फैलाव की पुष्टि हुई है। वहीं सोमालिया में सुरक्षा बलों ने आईएस के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 आतंकवादियों को मार गिराया और 150 से ज्यादा को गिरफ्तार किया।

लेक चाड और विदेशी सहायता

संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-रोधी समिति की प्रमुख नतालिया गेरमन ने बताया कि उत्तर-मध्य अफ्रीका के लेक चाड बेसिन में आईएस को विदेशी फंडिंग, ड्रोन और विस्फोटक उपकरणों जैसी सहायता मिल रही है। उन्होंने अफ्रीका को वैश्विक आतंकवाद से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा शिकार बताया।

पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान में खतरा बरकरार

इराक और सीरिया में आईएस अब भी सक्रिय है और उत्तर-पश्चिमी बादिया रेगिस्तान में फिर से पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। यह स्थानीय प्रशासन को अस्थिर करने और सांप्रदायिक तनाव भड़काने की रणनीति अपना रहा है। अफगानिस्तान में आईएस का सहयोगी ‘खुरासान’ समूह, अब भी पश्चिम एशिया और आसपास के इलाकों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है। वोरोनकोव ने चेताया कि यह संगठन स्थानीय समुदायों, अल्पसंख्यकों और विदेशी नागरिकों को लगातार निशाना बना रहा है। (भाषा)

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