वाशिंगटनः अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में आज बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए अंधाधुंध टैरिफ के मामले पर सुनवाई शुरू हो चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफों की वैधता पर ऐतिहासिक सुनवाई कर रहा है। अमेरिका में स्थानीय समयानुसार सुबह 10 बजते ही कोर्ट में बहस शुरू हो गई। मौखिक बहसें 'लर्निंग रिसोर्सेज इंक बनाम ट्रंप' मामले में केंद्रित हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करने वाली हैं।
किस बात पर आना है फैसला
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इमरजेंसी पावर्स का इस्तेमाल कर कांग्रेस की मंजूरी के बिना लगाए गए टैरिफों की वैधता की न्यायाधीश जांच कर रहे हैं। ट्रंप का यह टैरिफ भारत, चीन, ब्राजील समेत यूरोपीय संघ समेत व लगभग हर प्रमुख व्यापारिक साझेदार पर लागू है। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर 2018 से ये टैरिफ लगाए, जो स्टील, एल्यूमीनियम और अन्य वस्तुओं पर 25% तक पहुंच गए। आलोचकों का कहना है कि यह कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, जबकि समर्थक इसे अमेरिकी उद्योगों की रक्षा बताते हैं।
टैरिफ वार में आ सकता है नया मोड़
विशेषज्ञों के अनुसार कोर्ट 'शेर की गुफा' में प्रवेश कर चुका है, जहां न्यायाधीशों की राय व्यापार युद्ध को नया मोड़ दे सकती है। विपक्षी और प्रभावित कंपनियां तर्क दे रहे हैं कि टैरिफ उपभोक्ताओं पर बोझ डालते हैं और मुद्रास्फीति बढ़ाते हैं।
यह केस न केवल ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति को परखेगा, बल्कि भविष्य के राष्ट्रपतियों की शक्तियों को भी परिभाषित करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक बहस में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने ट्रंप प्रशासन से सख्त सवाल पूछे।
दुनिया को ट्रंप के टैरिफ पर फैसले का इंतजार
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में चल रही इस सुनवाई को पूरी दुनिया सांसें थामे इंतजार कर रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, यदि टैरिफ अमान्य साबित हुए, तो अरबों डॉलर के प्रतिफल की मांग हो सकती है। इस सुनवाई के बाद आने वाला कोर्ट का फैसला अमेरिकी लोकतंत्र और वैश्विक व्यापार के भविष्य को नया आकार देगा।