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बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जताई हैरानी, राजनीतिक दलों से मांगा जवाब

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Pankaj Yadav
 Published : Aug 22, 2025 02:53 pm IST,  Updated : Aug 22, 2025 02:54 pm IST

कोर्ट ने चुनाव आयोग को 65 लाख मतदाताओं की सूची जारी करने का आदेश दिया था, जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं थे। आयोग ने बताया कि इनमें से 22 लाख मृत, 36 लाख स्थानांतरित, और 7 लाख डुप्लिकेट नाम थे।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : PTI

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर हैरानी जताई और बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को निर्देश दिया कि वे सभी 12 पंजीकृत राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और महासचिवों को नोटिस जारी करें। कोर्ट ने कहा कि इन दलों को अगली सुनवाई में मतदाता सूची सुधार प्रक्रिया में अपनी भागीदारी की स्थिति पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई अब 8 सितंबर 2025 को होगी।

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मामले को लेकर बेंच ने क्या कहा

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वे इस बात से हैरान हैं कि 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) होने के बावजूद, राजनीतिक दलों की ओर से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सुधार के लिए केवल दो शिकायतें दर्ज की गई हैं। कोर्ट ने सभी 12 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को अगली सुनवाई में मौजूद रहने का आदेश दिया।

नाम दर्ज कराने और सुधार के लिए कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाताओं को राहत देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने या सुधार के लिए अब ऑनलाइन आवेदन जमा किए जा सकते हैं। इसके लिए फॉर्म को भौतिक रूप से जमा करना जरूरी नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 के लिए निर्धारित 11 दस्तावेजों या आधार कार्ड में से कोई एक दस्तावेज जमा करना पर्याप्त होगा।

राजनीतिक दलों को कोर्ट की हिदायत

सुनवाई में कुछ राजनीतिक दलों ने दलील दी कि उनके बूथ लेवल एजेंट्स को आपत्तियां दर्ज करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर दल अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाते, तो प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुधार की स्थिति बेहतर होती। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि आम लोग राजनीतिक दलों से ज्यादा जागरूक हैं, क्योंकि 1 अगस्त के बाद 2.63 लाख नए मतदाताओं ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है।

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