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अपने नाम में 'राम' को बदलकर 'राक्षस' क्यों नहीं कर लेते मांझी, BJP ने पूछा तल्ख सवाल

जीतन राम मांझी ने कहा था कि उन्हें बिहार के स्कूली पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने यह कहकर विवाद भी खड़ा कर दिया कि रामायण की कहानी सच्चाई पर आधारित नहीं है।

Reported by: Bhasha
Published : Sep 23, 2021 10:53 am IST, Updated : Sep 23, 2021 10:58 am IST
jitan ram manjhi- India TV Hindi
Image Source : PTI भगवान राम को लेकर जीतन राम मांझी के बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी

पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी भगवान राम के बारे में विवादास्पद बयान देने के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा नेताओं के रडार पर आ गए। भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर ने मांझी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि जीतन राम मांझी अपने नाम में 'राम' शब्द को बदलकर 'राक्षस' क्यों नहीं कर लेते, क्योंकि वह मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम में विश्वास नहीं करते हैं।

ठाकुर ने कहा, "मांझी ने राम के अस्तित्व पर सवालिया निशान लगाया। मैं मांझी से पूछना चाहता हूं कि उनके माता-पिता ने उनका नाम जीतन राम मांझी क्यों रखा। वह अपना मध्य नाम बदलकर 'राक्षस' क्यों नहीं कर लेते। वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम पर घटिया राजनीति कर रहे हैं। मधुबनी जिले के विसफी से भाजपा विधायक ने कहा कि राम केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में पूजे जाते हैं। जीतन राम मांझी ने मंगलवार को कहा था कि उन्हें बिहार के स्कूली पाठ्यक्रम में रामायण को शामिल किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने यह कहकर विवाद भी खड़ा कर दिया कि रामायण की कहानी सच्चाई पर आधारित नहीं है।

मांझी ने कहा, "रामायण में कई अच्छी चीजें हैं, जिनका उपयोग हमारे बच्चों और महिलाओं को शिक्षित करने के लिए किया जा सकता है। हमारे बड़ों और महिलाओं का सम्मान करना इस पुस्तक की विशेषताएं हैं। मुझे रामायण को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि यह एक काल्पनिक पुस्तक है और मुझे नहीं लगता कि राम एक महान व्यक्ति थे और उनका वास्तविक जीवन था।"

भाजपा के ओबीसी विंग के राष्ट्रीय महासचिव निखिल आनंद ने कहा, "जीतन राम मांझी बिहार के एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें ऐसी किसी भी चीज पर बयान देने से बचना चाहिए, जिससे लोगों के ध्रुवीकरण की संभावना हो। उनका बयान इस धरती से आने वाले हर महान व्यक्ति के खिलाफ है। उन्होंने भगवान राम के खिलाफ जो कुछ भी कहा, वह देश के लोगों की एक बड़ी संख्या को आहत कर सकता है। यह जीतन राम मांझी की सस्ती राजनीति है।"

बता दें कि रामायण को मध्य प्रदेश के स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और बिहार में इसे राज्य के पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की चर्चा चल रही है।

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