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JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से केसी त्यागी का इस्तीफा, राजीव रंजन प्रसाद को सौंपी गई जिम्मेदारी

केसी त्यागी ने जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को लेकर निजी कारणों का हवाला दिया गया है। अब ये जिम्मेदारी राजीव रंजन प्रसाद को सौंपी गई है।

Reported By : Nitish Chandra Edited By : Malaika Imam Published : Sep 01, 2024 10:13 am IST, Updated : Sep 01, 2024 10:45 am IST
केसी त्यागी- India TV Hindi
Image Source : SOCIAL MEDIA केसी त्यागी

पटना: जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से केसी त्यागी ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह निजी करणों को बताया गया। उनकी जगह राजीव रंजन प्रसाद को जेडीयू का राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। पार्टी के महासचिव आफाक अहमद खान ने पत्र जारी कर इसकी सूचना दी है।

विशेष सलाहकार भी नियुक्त किया

बयान के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राजीव रंजन प्रसाद को पार्टी का नया राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया है। जेडीयू के अनुभवी नेता त्यागी को मई 2023 में राष्ट्रीय प्रवक्ता के साथ ही विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया था। उनकी इस नियुक्ति के संबंध में जारी बयान में कहा गया था कि त्यागी के संगठनात्मक अनुभव का लाभ उठाने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री एवं पार्टी के प्रमुख नीतीश कुमार ने उन्हें पार्टी का विशेष सलाहकार और मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया है।

केसी त्यागी का इस्तीफा

Image Source : INDIATV
केसी त्यागी का इस्तीफा

"बयानों के कारण मतभेद शामिल"

हालांकि, केसी त्यागी के इस्तीफे के पीछे कई और वजह भी हो सकती है, जिनमें उनके बयानों के कारण पार्टी के भीतर और बाहर उत्पन्न मतभेद शामिल हैं। केसी त्यागी, जेडीयू के एक लंबे समय से प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने पिछले कुछ समय में कई ऐसे बयान दिए जो पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग थे। उन्होंने कई मौकों पर पार्टी नेतृत्व या अन्य वरिष्ठ नेताओं से परामर्श किए बिना बयान जारी किए। इस कारण पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति दिखने लगी, जो धीरे-धीरे गंभीर हो गई।

केसी त्यागी के बयानों की वजह से एनडीए के भीतर भी मतभेद की खबरें सामने आईं। खासकर विदेश नीति के मुद्दे पर उन्होंने इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ सुर मिलाते हुए इजराइल को हथियारों की आपूर्ति रोकने के लिए एक शेयर बयान पर हस्ताक्षर कर दिए। यह कदम जेडीयू नेतृत्व को असहज करने वाला था। इसके कारण पार्टी के भीतर और बाहर विवाद बढ़ गया।

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