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देश की 3 नामी IAS कोचिंग संस्थानों पर चला सरकार का चाबुक, लगाया 15 लाख का जुर्माना, किया था ये गलत काम

 Published : Dec 26, 2024 04:51 pm IST,  Updated : Dec 26, 2024 04:52 pm IST

सरकार ने तीन बड़े जानें-मानें सस्थानों पर अपना चाबुक चलाया है। ये संस्थान अपने रिजल्ट को लेकर बच्चों को गुमराह कर रहे थे। इस कारण सरकार ने इन पर लाखों का जर्माना लगाया है।

UPSC Civil Services Examinations- India TV Hindi
UPSC Image Source : FILE PHOTO

सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने देश के तीन जानें-माने संस्थानों पर एक्शन लिया है। CCPA तीनों IAS कोचिंग संस्थानों पर लाखों का जुर्माना लगाया है साथ ही भविष्य में गुमराह न करने को भी कहा है। तीनों IAS कोचिंग संस्थानों पर आरोप है कि ये मिसलीडिंग एड के जरिए छात्रों को एडमिशन के लिए लुभाने की कोशिश कर रहे थे। इस कारण CCPA ने इन तीनों पर 15 लाख रुपये का बड़ा जुर्माना लगाया है।

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सफलता दर को लेकर कर रहे थे घोटाला

मिली जानकारी के मुताबिक, सीसीपीए ने पाया कि कुछ कोचिंग संस्थान यूपीएससी की 2022 और 2023 की सिविल सेवा परीक्षाओं के रिजल्ट के संबंध में अपनी सफलता दर के बारे में भ्रामक विज्ञापन (मिसलीडिंग एडवरटाइजमेंट) दे रहे हैं। इसके बाद सीसीपीए ने जांच की तो पाया कि तीन कोचिंग संस्थानों ऐसा कर रहे हैं, इसके बाद इन पर कुल 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

इन संस्थानों पर लगा जुर्माना

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यूपीएससी की 2022 और 2023 की सिविल सेवा परीक्षाओं के रिजल्ट्स के संबंध में मिसलिडिंग एड करने के लिए वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट (Vajirao & Reddy Institute) और स्टडीआईक्यू आईएएस (StudyIQ IAS) पर 7-7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि एज आईएएस (Edge IAS) पर 1,00,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

जानबूझकर बातें छिपाई

जांच की अगुवाई कर रही मुख्य आयुक्त निधि खरे के नेतृत्व में सीसीपीए ने पाया कि संस्थानों ने जानबूझकर यह बात छिपाई कि उनके अधिकांश सफल उम्मीदवारों ने केवल इंटरव्यू मार्गदर्शन कार्यक्रमों में ही अपना नामांकन कराया था, जिससे उनके अन्य सिलेबस के प्रभाव के बारे में मिसलिडिंग इंप्रेशन बना। आगे कहा गया कि वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट ने साल 2022 की परीक्षा में "933 में से 617 चयन" का दावा किया, जबकि स्टडीआईक्यू आईएएस ने 2023 में "120+ चयन" का एड निकाला। जांच से पता चला कि दोनों संस्थानों में सफल उम्मीदवारों में से अधिकांश ने केवल इंटरव्यू की तैयारी के कोर्स लिए थे।

फीस रसीद तक नही दे सका संस्थान

जांच में स्टडीआईक्यू आईएएस अपने "सफलता पक्का ऑफर" और "चयन पक्का ऑफर" प्रचार को सही साबित करने में भी असमर्थ रहा, साथ ही अपने कथित सफल उम्मीदवारों के लिए नामांकन फॉर्म और फीस रसीदें भी नहीं दी। संस्थान ने 60 से अधिक कोर्सों का एड दिया, लेकिन यह खुलासा नहीं किया कि उसका इंटरव्यू मार्गदर्शन कार्यक्रम जिसे अधिकांश सफल उम्मीदवारों ने लिया, एड में शामिल नहीं था। बता दें कि उपभोक्ता संरक्षण निकाय ने मिसलिडिंग एड के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों को 45 नोटिस जारी किए हैं और अब तक 22 संस्थानों से कुल 71.6 लाख रुपये का जुर्माना वसूला है।

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