1. Hindi News
  2. एजुकेशन
  3. अब तुरंत पास हुए ग्रेजुएट उम्मीदवार नहीं दे सकेंगे ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

अब तुरंत पास हुए ग्रेजुएट उम्मीदवार नहीं दे सकेंगे ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

 Written By: Shailendra Tiwari
 Published : May 20, 2025 11:38 am IST,  Updated : May 20, 2025 11:57 am IST

अब तुरंत लॉ ग्रेजुएशन पास उम्मीदवार ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम में शामिल नहीं हो सकते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर अब कुछ शर्तें रखी हैं।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : FILE PHOTO

अब लॉ ग्रेजुएशन पास हुए नए उम्मीदवार न्यायिक सेवा परीक्षा यानी ज्यूडिशियल सर्विस एग्जाम में शामिल नहीं हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले के दौरान कहा कि ज्यूडिशियल सर्विस में आने के लिए उम्मीदवार के पास वकील के रूप में अनुभव होना जरूरी है। यह फैसला सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस विनोट चंद्रन की बेंच ने दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बैठने के लिए 3 साल की न्यूनतमें प्रैक्टिस की आवश्यकता को बहाल किया जाता है। सभी राज्य सरकारें नियमों में संशोधन करके यह सुनिश्चित करें कि सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में बैठने वाले के पास कम से कम 3 साल वकालत की प्रैक्टिस हो। इसे बार में 10 साल के अनुभव रखने वाले वकील द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए। न्यायाधीशों के लिए लॉ क्लर्क के रूप में एक्सपीरिएंस को भी इस अनुभव में गिना जाएगा। उन्हें (उम्मीदवारों को) कोर्ट में अध्यक्षता करने से पहले एक साल की ट्रेनिंग लेनी होगी।

क्या अभी चल रही भर्तियों पर भी लागू होंगे ये नियम?

आगे कोर्ट ने साफ किया कि अभी ये आवश्यकताएं चल रही ज्यूडिशियल भर्ती पर लागू नहीं होंगी, बल्कि केवल भावी रूप से लागू होंगी। कोर्ट ने कहा कि जहां हाईकोर्ट के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी है, वहां, न्यूनतम प्रैक्टिस की आवश्यकता लागू नहीं होगी और यह तभी लागू होगी जब अगली भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी।

क्यों लिया यह फैसला?

कोर्ट ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया नए लॉ ग्रेजुएट्स की जज के रूप में कई सारी समस्याएं सामने आईं, अनुभवहीन लॉ ग्रेजुएट न्यायिक अधिकारियों को सौंपे गए महत्वपूर्ण कार्यों को संभालने के लिए पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं हो सकते।

इस कारण सुप्रीम कोर्ट ने रखी शर्त

यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा न्यायिक सेवा नियमों में 2002 में संशोधन करके, सिविल जज बनने के इच्छुक लोगों के लिए अनिवार्य 3 वर्ष की कानूनी प्रैक्टिस की आवश्यकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के दायर होने के बाद आया। इस नियम को बाद में विभिन्न राज्यों द्वारा भी अपनाया गया, जिसके तहत प्रवेश स्तर के सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए न्यायिक सेवा परीक्षा में बैठने से पहले उम्मीदवारों के पास वकील के रूप में कम से कम 3 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक था।

ये भी पढ़ें:

एमबीबीएस समेत अन्य मेडिकल छात्र ध्यान दें, एनएमसी ने जारी की नई एडवाइजरी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। एजुकेशन से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।