नई दिल्ली: इंडिया टीवी स्पीड न्यूज एजुकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन शुरू हो चुका है। इस कॉन्क्लेव में शिक्षा से जड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इनमें से एक मु्द्दा हाई कटऑफ, कॉलेज प्रवेश के लिए संघर्ष भी है, इस मुद्दे पर इंडिया टीवी स्पीड न्यूज एजुकेशन कॉन्क्लेव में दिल्ली विश्विद्याल के हिंदू कॉलेज की प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. अंजू श्रीवास्तव, एसआरसीसी की प्रिंसिपल प्रोफेसर सिमरित कौर और रामजस कॉलेज के प्रोफेसर अजय कुमार चर्चा की।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज के प्रोफेसर अजय कुमार अरोड़ा ने कहा, "दिल्ली विश्वविद्यालय में रेगुलर कॉलेज के अलावा स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग होता है जो डिस्टेंस एजुकेशन मोड में आता है। इसमें भी 3 से तकरीबन चार लाख स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं(एक साल की बात करें तो लगभघ 1.5 लाख स्टूडेंट्स एडमिशन लेते हैं)।
'आपको घबराना नहीं है, बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है'
प्रोफेसर डॉ. अंजू श्रीवास्तव ने कहा, "सीयूईटी से एक राहत भी मिलती है। अगर आप अपनी पढ़ाई में थोड़े रेगुलर रहे हैं तो अच्छे स्कोर करने के पूरे चांसेज हैं। स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) को लेकर कहा कि इसके साथ जो पहले ड्रॉबेक्स माने जाते थे वो सब खत्म हो चुके हैं। SOL की सक्सेस स्टोरी बहुत सारी भी हैं। आपको घबराना नहीं है, बस अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है, फल की चिंता नहीं करनी है फल आपको अच्छा ही मिलना चाहिए।"
'अगर एडमिशन न मिले तो अपना समय वेस्ट नहीं करें'
प्रोफेसर सिमरित कौर ने कहा, "श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स जब शुरू हुआ था तो तकरीबन 600 बच्चों के लिए था आज का इंफ्रास्ट्रक्चर। आज की तारीख में 3500 से ज्यादा बच्चों को वो एबसोर्ब कर रहा है। तो लिमिटेड इंफ्रास्ट्रक्चर होते हुए भी हम सीट साइज को एक्पेंड कर रहे हैं कि हम लोग एकोमोडेट कर सकें। लेकिन उसके बावजूद भी संभव नहीं। जनरली देखा जाता है कि एडमिशन सभी को मिल जाता है लेकिन अपनी पसंद और मतलब के कॉलेज में नहीं मिल पाती।"
"यदि आपको एडमिशन नहीं मिलती है तो आपको अपना समय वेस्ट नहीं करना है और अपने आपको स्किस सेट्स के ऊपर लेकर आना है।"