Explainer: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आखिरी चरण की वोटिंग खत्म होने के बाद सबकी निगाहें एक्जिट पोल पर टिकी होंगी। लोग बेसब्री से एक्जिट पोल के आंकड़ों का इंतजार करने लगेंगे। 11 नवंबर को वोटिंग खत्म होने ही एक्जिट पोल के आंकड़े आने लगेंगे। वोटों की गिनती और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 122 सीटों की जरूरत होती है।
एग्ज़िट पोल क्या होते हैं?
एग्ज़िट पोल मतदान के बाद का एक सर्वेक्षण होता है। इसका उद्देश्य मतदाताओं की प्राथमिकताओं को समझना और चुनाव के संभावित परिणामों की भविष्यवाणी करना होता है। मतदाताओं के मतदान केंद्रों से निकलने के बाद किए जाने वाले ये पोल इस बात का आकलन करते हैं कि लोगों ने कैसे और क्यों मतदान किया।
हालांकि पिछले एक्गिट पोल के अनुभव ये बताते हैं कि बिहार चुनाव के एक्गिट पोल हमेशा पूरी तरह सटीक नहीं होते, लेकिन ये मतदाताओं की भावनाओं के बारे में जानकारी देते हैं और आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले संभावित रुझानों का संकेत देते हैं।
एग्ज़िट पोल की सटीकता कई चीजों पर निर्भर करती है, जिनमें इस्तेमाल किए गए सैंपल प्रॉसेस, त्रुटि का मार्जिन और मतदाताओं की अपनी पसंद साझा करने की इच्छा शामिल है।
चूंकि एग्ज़िट पोल के सैंपल आमतौर पर वोटिंग के दिन ही लिए जाते हैं, इसलिए उम्मीद की जाती है कि ये बिहार चुनाव के नतीजों के मूड को ओपिनियन पोल की तुलना में बेहतर ढंग से दर्शाएंगे। ओपिनियन पोल चुनाव से पहले किए जाते हैं और वे ज्यादातर अटकलबाजियों पर आधारित होते हैं।
एग्ज़िट पोल कैसे किए जाते हैं?
एग्जिट पोल के लिए सर्वेक्षण एजेंसियां मतदाताओं से मतदान के बाद संपर्क करती हैं। वे पहले से एक स्ट्रक्चर्ड प्रश्नावली का उपयोग करके उनसे उनके मतदान विकल्पों और जनसांख्यिकीय कारकों, जैसे आयु, लिंग और धर्म, के बारे में पूछ कर सैंपल तैयार करती हैं।
इस प्रक्रिया में पूछे जानेवाले सवाल आमतौर पर संक्षिप्त रखे जाते हैं ताकि पैटर्न का स्पष्ट अनुमान लगाया जा सके। संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए, मतदान एजेंसियां विभिन्न क्षेत्रों के शहरी और ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों से सैंपल का चयन करती हैं। अपने दृष्टिकोण के आधार पर, मतदाता संभावित परिणामों की एक व्यापक तस्वीर बनाने के लिए यादृच्छिक या रणनीतिक नमूनाकरण तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं।
वोटर्स के रिएक्शंस एकत्र हो जाने, विश्लेषक रुझानों का पता लगाने, क्षेत्रीय विविधताओं की पहचान करने के बाद यह आकलन करने के लिए डेटा का प्रसंस्करण करते हैं कि कौन सी पार्टियां या उम्मीदवार विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में आगे चल सकते हैं। यद्यपि एग्जिट पोल निजी एजेंसियों द्वारा किए जाते हैं, लेकिन इनका रेग्यूलेशन भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा किया जाता है।
चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, मतदान के अंतिम चरण के समाप्त होने तक कोई भी सर्वेक्षण अनुमान प्रसारित या प्रकाशित नहीं किया जा सकता है। इस नियम का उल्लंघन करने पर दो साल तक की कैद या जुर्माना सहित दंड हो सकता है।