ChatGPT, Google Gemini जैसे AI टूल्स के आने के बाद हमारी लाइफ काफी आसान हो गई है। हमें कुछ भी जानना होता है हम तुरंत अपने भरोसेमंद एआई टूल से पूछ लेते हैं। ये एआई टूल्स हमारे पूछे गए सवालों का जबाब बिलकुल इंसानों की तरह देता है। हम जिस लहजे में इनसे सवाल का जबाब मांगते हैं, ये हमें उसी लहजे में उत्तर दे देते हैं। यही नहीं, हम एआई से सिर्फ कमांड एंटर करके फोटो और वीडियो भी जेनरेट करवा लेते हैं। क्या आप जानते हैं कि चैटजीपीटी, गूगल जेमिनी या ग्रोक जैसे एआई टूल आपके द्वारा पूछे गए एक सवाल का जबाब देने के लिए कितनी बिजली की खपत करते हैं या फिर इसमें कितना पानी बर्बाद होता है?
जेनरेटिव एआई के आने के बाद टेक सेक्टर के कई एक्सपर्ट्स ने ये सवाल उठाए थे कि ये पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाएंगे। एआई की कॉम्प्लैक्स कोडिंग की वजह से सर्वर को ठंडा रखने के लिए काफी मात्रा में पानी की जरूरत हो सकती है। यही नहीं, ये टूल्स भारी मात्रा में बिजली की भी खपत करते हैं। एआई इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की संख्यां 2022 के बाद से तेजी से बढ़ी है। ऐसे में एआई से सवाल पूछे जाने की दर में भी कई गुना का इजाफा हुआ है। कई पर्यावरणविद ये आशंका जता रहे हैं कि यह इजाफा पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
कितनी बिजली होती है खर्च?
चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में यह रिवील किया है कि यूजर द्वारा पूछे गए एक सवाल का जबाब देने के लिए एआई चैटबॉट कितनी बिजली खर्च करता है और कितने पानी की बर्बादी होती है। सैम ऑल्टमैन ने बताया कि एक एवरेज क्वेरी के लिए 0.34Wh की बिजली हर सेकेंड खर्च होती है। इतनी बिजली में आप एक हाई इफिशिएंसी लाइट बल्ब को कुछ मिनट तक जला सकते हैं।
कितना पानी होता है बर्बाद?
पानी की बात करें तो एक क्वेरी में चैटजीपीटी करीब 0.0000085 गैलन पानी बर्बाद करता है। आसान भाषा में कहा जाए तो एक क्वेरी के बदले में एक चम्मच के 15वें हिस्से के बराबर पानी की खपत होती है। सैम ऑल्टमैन ने अपने लेटेस्ट ब्लॉग में चैटजीपीटी द्वारा खर्च किए जाने वाले बिजली और पानी के बारे में यह जानकारी दी गई है। हाल ही में एआई मॉडल्स के सस्टेन करने में लोगों और रेगुलेटरी बॉडी द्वारा उठाए गए सवाल को लेकर सैम ऑल्टमैन ने अपने ब्लॉग में यह बात रखी है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 के आखिर तक एआई द्वारा खर्च की जाने वाली बिजली की मात्रा बिटकॉइन माइनिंग के लिए लगने वाली बिजली को पार कर सकता है।

हालांकि, सैम ऑल्टमैन ने माना कि इंटेलिजेंस के लिए बिजली की खपत जरूरी है। एआई के ऑपरेशन को बरकरार रखने के लिए बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है। डेटा सेंटर के ऑटोमैशन को एडवांस बनाया जा रहा है, जिसके लिए भी भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। हालांकि, सैम ऑल्टमैन ने ये नहीं बताया कि बिजली और पानी की खपत वाला डेटा वो कहां से लेकर आए हैं।
अपने ब्लॉग में सैम ऑल्टमैन ने दावा किया है कि चैटजीपीटी किसी भी इंसान से ज्यादा शक्तिशाली है। इसमें आर्टिफिशियल दिमाग के साथ-साथ इंसानियत को भी इंटिग्रेट किया गया है। यह साल एआई एजेंट्स के लिए डेडिकेटेड है। एआई एजेंट्स अब कम्प्यूटर कोड्स लिख सकते हैं। 2026 में यह सिस्टम खुद को अपग्रेड करेगा। इसके अलावा 2027 तक ऐसे रोबोट्स आ जाएंगे, जो बिलकुल इंसानों की तरह काम करेंगे। इन रोबोट्स को रियल वर्ल्ड में काम करने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।
Ghibli ट्रेंड में पिघलने लगे थे सर्वर
पिछले दिनों ChatGPT ने Ghibli फीचर को ChatGPT में जोड़ा था। इस फीचर के जरिए यूजर्स अपने किसी भी तस्वीर को Ghibli एनिमेशन वाले स्टाइल में कन्वर्ट किया जा सकता है। इसके ट्रेंड में आने के बाद दुनियाभर के करोड़ों यूजर्स ChatGPT का इस्तेमाल Ghibli स्टाइल वाले इमेज जेनरेट करने लगे। जिसकी वजह से चैटजीपीटी का सर्वर ग्लोबली घंटो ठप पड़ गया था। बाद में सैम ऑल्टमैन को यूजर्स से गुजारिश करनी पड़ी थी। ऑल्टमैन ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से बताया था कि एक साथ भारी मात्रा में एनिमेशन वाली फोटो जेनरेट करने वाली रिक्वेस्ट की वजह से डेटा सेंटर के सर्वर पिघल रहे हैं।
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