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Explainer: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु वार्ता में पक रही कौन सी खिचड़ी, जानें कहां तक पहुंची बात

 Published : Apr 20, 2025 12:17 pm IST,  Updated : Apr 20, 2025 12:17 pm IST

ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की परमाणु वार्ता भी रोम में संपन्न हो गई है। हालांकि अभी यह खुलकर नहीं बताया गया है कि इसमें दोनों देशों में क्या सहमति बनी। इस बीच तीसरे दौर की वार्ता के लिए भी भूमिका तैयार की जाने लगी है। मगर यह वार्ता क्यों हो रही है, अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण है, आइये जानते हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच रोम में चल रही परमाणु वार्ता। - India TV Hindi
ईरान और अमेरिका के बीच रोम में चल रही परमाणु वार्ता। Image Source : AP

Explainer:रोम: ईरान और अमेरिका के बीच दूसरे दौर की परमाणु वार्ता रोम में संपन्न हो चुकी है। इसके बाद अब तीसरे दौर की परमाणु वार्ता भी शुरू होनी है। पहली परमाणु वार्ता ओमान में हुई थी। अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच चल रही इस वार्ता को काफी सकारात्मक बताया जा रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि रोम में वार्ता के दौरान कुछ वक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आमने-सामने बात की। दोनों पक्षों के बीच प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर चर्चाओं में बहुत अच्छी प्रगति हुई है।’’

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत रचनात्मक माहौल में हुई और मैं कह सकता हूं कि यह आगे बढ़ रही है। मुझे उम्मीद है कि तकनीकी वार्ता के बाद हम बेहतर स्थिति में होंगे।’ वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने वार्ता के तुरंत बाद तेहरान के सरकारी टेलीविजन को बताया कि ईरान अपने देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटवाने के लिए गंभीरता के साथ वार्ता जारी रखेगा। बाघेई ने कहा था, ‘‘ईरान तब तक बातचीत जारी रखेगा जब तक कि वार्ता रचनात्मक और उद्देश्यपूर्ण तरीके से चलती रहेगी। मगर यहां यह जानना जरूरी है कि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता क्यों हो रही है, अमेरिका ईरान से क्या चाहता है....आइये आपको विस्तार से समझाते हैं।

ईरान के साथ परमाणु वार्ता से क्या चाहता है अमेरिका 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ परमाणु वार्ता क्यों करवा रहे हैं...यह जानना बहुत जरूरी है....तो आपको बता दें कि इस वार्ता के पीछे अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। अमेरिका ईरान के साथ परमाणु वार्ता इसलिए कर रहा है ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जाए, मध्य पूर्व में स्थिरता बनी रहे, और आर्थिक/सैन्य दबाव के जरिए ईरान को एक सख्त समझौते के लिए राजी किया जाए। हालांकि, ईरान ने शर्त रखी है कि वार्ता केवल उसके परमाणु कार्यक्रम के सैन्यीकरण तक सीमित हो और उसके शांतिपूर्ण कार्यक्रम को समाप्त करने की बात न हो। आइये इसे बिंदुवार समझते हैं। 

1.  परमाणु हथियारों की रोकथाम

अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को संदेह है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सैन्य उद्देश्यों के लिए हो सकता है, भले ही ईरान दावा करता हो कि यह शांतिपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने चेतावनी दी है कि ईरान परमाणु बम बनाने के करीब है, जिससे वैश्विक सुरक्षा को खतरा हो सकता है। इसलिए अमेरिका ईरान को नियंत्रित रखना चाहता है।

2.  क्षेत्रीय स्थिरता

ईरान का परमाणु हथियार विकसित करना मध्य पूर्व में हथियारों की दौड़ को बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि सऊदी अरब जैसे अन्य देश भी परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है।

3.  आर्थिक प्रतिबंध और दबाव

2018 में अमेरिका ने जेसीपीओए (संयुक्त व्यापक कार्य योजना) से हटकर ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। वार्ता के जरिए अमेरिका इन प्रतिबंधों में राहत देने की शर्त पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना चाहता है। ईरान की भी यही मांग है कि अमेरिका उस पर लगे प्रतिबंधों को हटा ले।

4.  डोनाल्ड ट्रंप की नीति

 ट्रंप प्रशासन ने “अधिकतम दबाव” नीति अपनाई है, जिसमें ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करने के लिए आर्थिक और सैन्य दबाव शामिल है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना चाहते हैं या नया, सख्त समझौता चाहते हैं, जिसमें शांति और स्थिरता हो, परमाणु हथियारों का प्रसार न हो। 

5.  सऊदी अरब और इजरायल की चिंताएं

 सऊदी अरब और इजरायल, जो ईरान को क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानते हैं, चाहते हैं कि कोई भी नया समझौता ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं पर सख्त पाबंदी लगाए। ये देश अमेरिका पर दबाव डाल रहे हैं कि ईरान की क्षेत्रीय ताकत को कम किया जाए। अगर वह परमाणु संपन्न हो गया तो इससे मध्य-पूर्व में स्थिरता बढ़ेगी। 

6.  ओमान की मध्यस्थता

ओमान जैसे देशों की मध्यस्थता से वार्ता का रास्ता खुला है, जिसे दोनों पक्ष सकारात्मक मान रहे हैं। यह वार्ता 2018 के बाद पहली उच्च-स्तरीय बातचीत है, जो तनाव कम करने और समझौते की संभावना को दर्शाती है। ओमान के बाद दूसरे दौर की वार्ता रोम में हुई है। अब तीसरे दौर की वार्ता के लिए भी जल्द ही सूचनाएं जारी होंगी। 

 

 

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