Volcanic Eruption: इथियोपिया में हैली गुब्बी ज्वालामुखी के फटने की खबरें चर्चा में हैं। ज्वालामुखी को ऐसा पहाड़ कहा जा सकता है जो आमतौर पर शांत नजर आते हैं, लेकिन अचानक 'गुस्से' में आकर लावा, राख और गैस उगलने लगते हैं। दुनिया भर में लोग इन्हें प्रकृति की ताकत का प्रतीक मानते हैं, और कई बार इनके फटने से व्यापक तबाही भी मचती है। क्या आपने कभी सोचा है कि ज्वालामुखी क्यों इतने अचानक फट पड़ते हैं? या फिर इतिहास का सबसे खतरनाक विस्फोट कब हुआ था? आज हम आपको बताएंगे कि ज्वालामुखी कैसे बनते हैं, क्यों फटते हैं, और क्या भारत में भी कोई सक्रिय ज्वालामुखी है।
ज्वालामुखी क्या हैं और कैसे बनते हैं?
ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर वो स्थान हैं जहां से पिघली हुई चट्टानें, जिन्हें मैग्मा कहते हैं, बाहर निकलती हैं। पृथ्वी के अंदर, करीब 100-200 किलोमीटर की गहराई में, तापमान इतना ज्यादा होता है कि चट्टानें पिघल जाती हैं। ये मैग्मा हल्का होता है, इसलिए ऊपर की तरफ उठता है, जैसे पानी में हवा के बुलबुले। जब ये सतह तक पहुंचता है, तो लावा बनकर बाहर आता है। ज्वालामुखी ज्यादातर वहां बनते हैं जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स (बड़ी-बड़ी चट्टानी प्लेटें) टकराती हैं या अलग होती हैं। उदाहरण के लिए, रिंग ऑफ फायर नाम की जगह, जहां प्रशांत महासागर के आसपास कई ज्वालामुखी हैं, क्योंकि वहां प्लेट्स हिल रही हैं। ये प्लेट्स साल में कुछ सेंटीमीटर चलती हैं, लेकिन इससे मैग्मा बनने में मदद मिलती है। अगर प्लेट्स टकराती हैं, तो एक प्लेट नीचे धंस जाती है और पिघलकर मैग्मा बनाती है। अगर अलग होती हैं, तो बीच में जगह बनती है और मैग्मा ऊपर आ जाता है।
आखिर क्यों अचानक फट पड़ते हैं ज्वालामुखी?
ज्वालामुखी अचानक फटते हैं क्योंकि मैग्मा के अंदर दबाव बहुत बढ़ जाता है। मैग्मा में पानी की भाप, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसें घुली होती हैं। जैसे-जैसे मैग्मा ऊपर आता है, दबाव कम होता है और ये गैसें बुलबुले बनाती हैं। ये बुलबुले तेजी से फैलते हैं, जैसे सोडा की बोतल हिलाने पर बुलबुले बनते हैं। अगर दबाव ज्यादा हो जाए, तो ज्वालामुखी की चोटी फट जाती है और विस्फोट होता है। कभी-कभी भूकंप या पानी का घुसना भी ट्रिगर करता है। जैसे, अगर बारिश का पानी ज्वालामुखी में घुस जाए, तो वो भाप बनकर दबाव बढ़ाता है, लेकिन मुख्य वजह मैग्मा का घनत्व और दबाव है। वैज्ञानिक कहते हैं कि ज्वालामुखी फटने से पहले कुछ संकेत मिलते हैं, जैसे छोटे भूकंप, गैस का निकलना या जमीन का फूलना। लेकिन कभी-कभी यह इतना तेजी से होता है कि चेतावनी का समय नहीं मिलता। इसलिए, ज्वालामुखी वाले इलाकों में मॉनिटरिंग जरूरी है।

इतिहास का सबसे खतरनाक विस्फोट कब हुआ था?
इतिहास में कई खतरनाक ज्वालामुखी विस्फोट हुए हैं, लेकिन सबसे घातक माना जाता है 1815 का माउंट टांबोरा का विस्फोट। ये इंडोनेशिया के सुंबावा द्वीप पर हुआ था। इस विस्फोट से करीब 71,000 लोग मारे गए था, कुछ लावा और राख से, तो कुछ भूखमरी और बीमारियों से। इतनी राख हवा में फैली कि पूरी दुनिया का तापमान गिर गया। 1816 को 'समर विथाउट समर' कहा गया, क्योंकि यूरोप और अमेरिका में फसलें बर्बाद हो गईं। एक और मशहूर विस्फोट 1883 का क्राकाटोआ था, जिसमें 36,000 से ज्यादा मौतें हुईं। ये इतना जोरदार था कि धमाके की आवाज 3,000 किलोमीटर दूर सुनी गई। ये विस्फोट बताते हैं कि ज्वालामुखी ना सिर्फ तबाही मचाते हैं, बल्कि वैश्विक जलवायु को भी प्रभावित करते हैं।
दुनिया में कितने सक्रिय ज्वालामुखी हैं?
दुनिया में करीब 1,350 ऐसे ज्वालामुखी हैं जो पोटेंशियली एक्टिव हैं, यानी कभी भी फट सकते हैं। इनमें से हर साल 50-70 ज्वालामुखी फटते हैं। सितंबर 2025 तक, 44 ज्वालामुखी सक्रिय रूप से फट रहे थे। ज्यादातर ये प्रशांत महासागर के आसपास हैं, जैसे इंडोनेशिया, जापान और अमेरिका में। अमेरिका में ही 169 सक्रिय ज्वालामुखी हैं। समुद्र के नीचे भी हजारों ज्वालामुखी हैं, जो हमें नजर नहीं आते।
भारत में कोई सक्रिय ज्वालामुखी है या नहीं?
भारत में ज्वालामुखी ज्यादा नहीं हैं, क्योंकि हमारी टेक्टोनिक प्लेट ज्यादा हिलती नहीं। लेकिन अंडमान और निकोबार द्वीपों में बैरन आइलैंड है, जो भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। ये 1787 से फट रहा है, और आखिरी बार 2023 में सक्रिय था। भारत में ज्वालामुखी का खतरा कम है, लेकिन अंडमान इलाके में निगरानी जरूरी है।

ज्वालामुखी को लेकर अतिरिक्त जानकारी
ज्वालामुखी के तीन मुख्य प्रकार के होते हैं। शील्ड (चपटे, जैसे हवाई के), स्ट्रैटो (शंकु वाले, जैसे फूजी) और कैल्डेरा (बड़े गड्ढे वाले)। इनके फटने से लावा, राख, जहरीली गैसें और लाहार (कीचड़ की बाढ़) आते हैं, जो शहरों को तबाह कर सकते हैं। लेकिन फायदे भी हैं, ज्वालामुखी वाली मिट्टी उपजाऊ होती है, और भू-ऊर्जा से बिजली बनती है। आज वैज्ञानिक सैटेलाइट और सेंसर से ज्वालामुखी की निगरानी करते हैं। जैसे, USGS जैसी एजेंसियां चेतावनी देती हैं।
प्रकृति की शक्ति याद दिलाते हैं ज्वालामुखी
कहना गलत नहीं होगा कि, ज्वालामुखी प्रकृति की शक्ति याद दिलाती है हमें इनसे डरना नहीं, बल्कि समझना चाहिए। अगर आप ज्वालामुखी वाले इलाके में रहते हैं, तो सरकारी चेतावनियों पर ध्यान दें। ये विस्फोट हमें बताते हैं कि पृथ्वी जिंदा है और हमें उसके साथ तालमेल बिठाना है।
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