Published : Jan 16, 2026 06:05 pm IST, Updated : Jan 16, 2026 06:05 pm IST
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विदेशी मुद्रा भंडार वह धनराशि और परिसंपत्तियां होती हैं, जिन्हें किसी देश का केंद्रीय बैंक (भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक) विदेशी मुद्राओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों के रूप में अपने पास सुरक्षित रखता है। इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाए रखना, मुद्रा की स्थिरता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन और भुगतान को सुचारु रूप से संचालित करना होता है।
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भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को बताया कि 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) में 392 मिलियन अमेरिकी डॉलर की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 687.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले वाले रिपोर्टिंग सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.809 अरब डॉलर घटकर 686.80 अरब डॉलर रह गया था।
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आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, 9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो भंडार का प्रमुख हिस्सा होती हैं, 1.124 अरब डॉलर घटकर 550.866 अरब डॉलर पर आ गईं। डॉलर के संदर्भ में व्यक्त की गई विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।
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9 जनवरी को खत्म हुए सप्ताह के दौरान सोने के भंडार का मूल्य 1.568 अरब डॉलर बढ़कर 112.83 अरब डॉलर हो गया। आरबीआई के मुताबिक, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (एसडीआर) में 39 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 18.739 अरब डॉलर रह गया।
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अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ भारत की रिज़र्व पोजीशन भी रिपोर्टिंग सप्ताह में 13 मिलियन डॉलर घटकर 4.758 अरब डॉलर पर आ गई। कुल मिलाकर, सोने के भंडार में मजबूती के चलते विदेशी मुद्रा भंडार में साप्ताहिक आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।