नीला आसमान, खूबसूरत पहाड़, हर तरफ हरियाली, नदी, झरने ऐसी जगहें जहां अक्सर स्वामी रामदेव भी पहुंच जाते हैं। अगर आप ये सब खूबसूरत नजारे देख पाते हैं तो जान लीजिए। आपसे बड़ा खुशनसीब कोई नहीं है क्योंकि आपकी आंखें सलामत है। कुदरत के इस नायाब नमूनों के दीदार का मौका कोई नहीं चूकता। खबर है कि इस महीने सिर्फ उत्तराखंड में 2 देशों के 20 हजार से ज्यादा ट्रेकर्स पहुंचने वाले हैं। लेकिन जरा उनके बारे में सोचिए जिनको ये खुशी हासिल नहीं है और ऐसे लोग सिर्फ भारत में सवा करोड़ से ज्यादा हैं। क्योंकि उनकी आंखों में रोशनी नहीं है वो देख नहीं सकते हैं। अगर आंखों की रोशनी बचपन से नहीं तो इसे कुदरत की नाइंसाफी कह सकते हैं लेकिन दुख तब और ज्यादा होता है जब बिगड़े लाइफ स्टाइल की कीमत आंखों की रोशनी खोकर चुकानी पड़ती है। खराब लाइफ स्टाइल तो आंखों का दुश्मन है ही कोरोना ने भी आंखों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्था-मोलॉजी के मुताबिक, कोरोना की वजह से 'EYE स्ट्रोक' हो रहा है। इसमें रेटिना पर ब्लड के थक्के जमते हैं जो आंखों में ऑक्सीजन के फ्लो को रोक देते है। कोरोना का खतरा तो है ही वैसे भी आंखों का ख्याल रखना बहुत जरुरी है। क्योंकि शरीर में होने वाली हर बीमारी का असर आंखों पर जरूर पड़ता है। डायबिटीज, हाई बीपी और स्ट्रेस ना सिर्फ हार्ट, किडनी पर असर डालते है बल्कि नजर भी कमजोर करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा खतरनाक है ग्लूकोमा जो धीरे धीरे आंखों की रोशनी छीन लेता है। भारत में लगभग 1 करोड़ 20 लाख ग्लूकोमा के मरीज़ हैं। जिसमे में 10 लाख मरीजों का विजन पूरी तरह खत्म हो चुका है। डायबिटीज ग्लूकोमा की बड़ी वजह है।।तो हाई बीपी रेटिना को परमानेंट डैमेज कर सकता है।।और कम उम्र में मोतियाबिंद का खतरा भी बढ़ा देता है। तो आंखों को योग और आयुर्वेद से कैसे बचाए। इसके लिए स्वामी रामदेव के साथ मिलकर 'सुपर विजन' योग करते हैं।
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