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क्या वैक्सीन लेने के बाद नहीं होगा ब्लैक फंगस का अटैक? डॉक्टर्स से जानिए जवाब

कोरोना की मार अब आंखों पर भी पड़ रही है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में आंखों से जुड़ी कई परेशानियां देखने को मिल रही हैं और ये एक बड़ा चैलेंज है।

India TV Lifestyle Desk India TV Lifestyle Desk
Updated on: May 09, 2021 13:26 IST
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Image Source : WWW.FREEPIK.COM क्या वैक्सीन लेने के बाद नहीं होगा ब्लैक फंगस का अटैक? डॉक्टर्स से जानिए जवाब  

आंखें हैं तो जिंदगी के रंग हैं, वर्ना जिंदगी अंधेरी, काली, स्याह और बेरंग है। जिसने एक उम्र तक अपनी आंखों से दुनिया को देखा हो, बच्चों की खिलखिलाहट, दोस्तों को साथ, मां-बाप का प्यार-दुलार और सब कुछ, दुनिया का हर रंग, फिर किसी वजह से उसकी आंखें चली जाएं, इससे बड़ा नुकसान और क्या हो सकता है। कोरोना की मार अब आंखों पर भी पड़ रही है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में आंखों से जुड़ी कई परेशानियां देखने को मिल रही हैं और ये एक बड़ा चैलेंज है। छोटी-मोटी दिक्कत तो ठीक है, लेकिन अब तो ऐसे मामले भी सामने आ रहे हैं, जहां लोगों को अपनी आंखें गंवानी पड़ रही हैं। खासतौर से गुजरात और महाराष्ट्र में ऐसे बहुत से केस देखने को मिल रहे हैं। गुजरात के सूरत में कई मरीजों की आंखों को हटाने के अलावा डॉक्टर्स के पास और कोई रास्ता बाकी नहीं बचा था। तो महाराष्ट्र में म्यूकोर माइकोसिस की वजह से कई कोरोना से ठीक हो चुके लोगों की जानें चली गईं। 

रविवार को इंडिया टीवी के 'जीतेगा इंडिया, हारेगा कोरोना' कॉन्क्लेव में म्यूकोर माइकोसिस आंखों पर ये किस तरह से हमला कर रहा है, इस पर एम्स के पूर्व निदेशक डॉक्टर एमसी मिश्रा, मेदांता अस्पताल के डॉक्टर अरविंदर, एम्स के प्रोफसर डॉ. अतुल कुमार ने चर्चा की। इन्होंने इस ब्लैक फंगस से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए।

सवाल: म्यूकोर माइकोसिस या ब्लैक फंगस इंफेक्शन क्या है?

जवाब: पिछले साल की एक वॉट्सएप सर्कुलेशन चल रही है, जिसमें गंगाराम हॉस्पिटल में कुछ म्यूकोर माइकोसिस के 2-3 केस रिपोर्ट हुए थे। ये कोई साधारण बात नहीं है। आईसीयू में जब लंबे समय के लिए रोगियों का ट्रीटमेंट होता है, तो सभी लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। वो फंगल इंफेक्शन के बहुत ज्यादा प्रवृत्त हो जाते हैं। इसलिए सभी आईसीयू के मरीजों में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल में एंटी फंगल मेडिकेशन शामिल होता है, लेकिन कुछ लोगों में जिन्हें डायबिटीज है या प्रतिरोधक क्षमता है ही नहीं, उन लोगों में ये म्यूकोर माइकोसिस फंगस हमला कर देता है। 

सवाल: जो पेशेंट कोरोना से ठीक हो चुका है, वो ब्लैक फंगस के लक्षण की कैसे पहचान करे?

जवाब: ये बहुत ही रेयर होगा, अगर कोई माइल्ड से मॉडरेट कोविड का रोगी है, घर पर है, ठीक हो गया है, उसको ये फंगल इंफेक्शन हो, ये बहुत ही दुर्लभ परिस्थिति होगी। ये कॉमन नहीं होता है। अगर किसी को दोबारा बुखार, नाक बंद होना, आंखों में दर्द, आंख लालन होना और सिर में दर्द शुरू हो जाए तो तुरंत चेकअप कराना चाहिए। ये फंगस जब ब्रेन में चला जाता है तो बहुत घातक हो जाता है। 

सवाल: घर पर रहते हुए अगर किसी को ब्लैक फंगस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो शुरुआती बचाव क्या है?

जवाब: अगर किसी को डायबिटीज है। छींके आना, नाक से पानी गिरना और अगर पहले साइनस का ऑपरेशन हो चुका है तो ऐसे लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। स्टीम लेते रहिए, ताकि साइनस खुला रहे, क्योंकि साइनस का खुला रहना बेहद जरूरी होता है। आमतौर से ये देखने को मिल रहा है कि आईसीयू में जिनका लंबा इलाज हुआ है, उनमें ज्यादा पाया जा रहा है। 

सवाल: ब्लैक फंगस होने की वजह? 

जवाब: ये कोविड मरीजों में आम से ज्यादा देखा गया है, पिछले साल की तुलना में और आईसीयू मरीजों की तुलना में। इसके जो मुख्य कारण हैं, वो ये हैं कि किसी को डायबिटीज है, किसी को बहुत दिन तक एंटीबायोटिक मिला है, जिसकी कभी-कभी जरुरत भी नहीं होता है। जिनको लॉन्ग टर्म ऑक्सीजन थेरेपी मिली है। जिन्हें स्टेरॉयड मिले हैं, स्पेशली हाई डोज। इसके अलावा जो लोग घर में ऑक्सीजनेशन लेते हैं, उनका सिलेंडर साफ नहीं है। ट्यूब साफ नहीं है। इससे भी हो सकता है। ये सारे कारण है, जिसकी वजह से ब्लैक फंगस हो सकता है। 

सवाल:  आंखों तक पहुंच जाने के बाद, इसके ब्रेन तक पहुंचने का खतरा और इसकी वजह से आंख को ही हटा दिया जाए, इसका दूसरा रास्ता क्यों नहीं है?

जवाब: एक टर्म यूज किया जाता है- इनवेसिवनेस। ये टिश्यू में धावा बोल देता है, जिसके बाद ज्यादा लोग बच नहीं पाते हैं। इसका बचाव ही एकमात्र उपाय है। आजकल माइल्ड कोविड में भी ज्यादातर लोग स्टेरॉइड का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसका कोई औचित्य नहीं है। 

सवाल: क्या स्टेरॉइड भी म्यूकोर माइकोसिस की वजह हो सकती है?

जवाब: बिल्कुल, जो हाई डोज स्टेरॉइड यूज हो रहे हैं, ये भी वजह है। कम से कम 50 प्रतिशत मामलों में इतने स्टेरॉइड या स्टेरॉइड देने की जरुरत होती ही नहीं है, लेकिन लोग पैनिक में आ रहे हैं। वॉट्सएप एडवाइज के आधार पर ये काम कर रहे हैं। जब ऑक्सीजनेशन कम होता है, सांस लेने में दिक्कत होती है, सेचुरेशन 94 से कम होता है, 7 दिन के बाद भी बुखार रहता है, ऐसी कंडीशन में स्टेरॉइड इस्तेमाल होते हैं। हर कोविड पॉजिटिव को स्टेरॉइड नहीं दिए जाते हैं। कोविड में स्टेरॉइड के ओवर यूज से ब्लैक फंगस हो रहा है। 

सवाल: गुजरात और महाराष्ट्र में आ रहे हैं ज्यादा केस, इसकी क्या वजह है?

जवाब: जो हमारा अभी जो मौसम चल रहा है, इस दौरान फंगल बढ़ता है। क्योंकि अभी मौसम में नमी है। इसलिए लोगों को बहुत ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।

सवाल: क्या कोरोना की पहली लहर में भी ऐसे केस देखने को मिले थे?

जवाब: नहीं, जितना इस बार देखा जा रहा है, उतना पिछली लहर में नहीं था। कुछ रेटिना की समस्याएं थीं। ज्यादा मेजर या फंगस इंफेक्शन नहीं हुआ था। 

सवाल: जिन लोगों ने वैक्सीन ले ली है, क्या वो इस फंगस इंफेक्शन से बचे रहेंगे?

जवाब: नहीं, वैक्सीन लेने का और फंगस का रिलेशन नहीं है। वैक्सीन लेने के बाद माइल्ड कोविड हो सकता है, लेकिन गंभीर कोरोना और मौत बहुत रेयर है। चूंकि मॉडरेट और गंभीर केसों में ही स्टेरॉइड का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए वैक्सीन लेने के बाद माइल्ड कोविड में स्टेरॉइड की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। अगर पड़ेगी भी तो कम डोज की ही पड़ेगी। ऐसे में तब ब्लैक फंगस के केस नहीं आने चाहिए। 

  

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