सांसों की माला न बिखरे इसके लिए फेफड़ों का दमदार होना जरुरी है इसलिए वक्त-वक्त पर टेस्ट करते रहिए। खासतौर पर ये उनके लिए और भी जरूरी है-- जिनको तंबाकू-सिगरेट की आदत है। क्योंकि स्मोकिंग वो कारगुजारी है जो लंग्स को बीमार, और बहुत बीमार कर देती है। सांस और धड़कन का होना ही हमारे जिंदा होने की निशानी है और इसलिए उन चीजों से परहेज करना जरुरी है, जो इन्हें धीमा करती हैं, इन्हें रोकती हैं। हमारा दिल हर मिनट औसतन 70 से 90 बार धड़कता है और इस दौरान हम करीब 15 से 20 बार सांस भी ले लेते हैं। सीधा हिसाब करें तो 3 से 4 धड़कनों के बीच में एक बार सांस की जरूरत पड़ती है।
मतलब ये कि सांस गहरी और क्वालिटी वाली होनी चाहिए ताकि शरीर में प्रॉपर ऑक्सीजन जाए। वो इसलिए भी कि सांस खींचने के बाद, जब हवा नाक के सुराखों से होते हुए गले में मौजूद विंड पाइप को पार कर, फेफड़ों में मौजूद छोटी-छोटी थैलियों में पहुंचती है तो फेफड़ों में मौजूद हीमोग्लोबीन ऑक्सीजन को बांध लेता है फिर दिल उस ऑक्सीजन वाले खून को पंप करके पूरे शरीर में पहुंचाता है ताकि ऑक्सीजन की मौजूदगी से बॉडी के हर पार्ट को एनर्जी मिलती रहे। मतलब जो चीज हमारे लिए इतनी अहम है उसे हम स्मोकिंग यानि मुंह में धुआं भरकर खराब करने लगते हैं। तंबाकू चबाकर बर्बाद करने की कोशिश में लगे रहते हैं। जाहिर है इससे शरीर के सभी अंग 37 ट्रिलियन सेल्स कराहने लगते हैं। बीमार पड़ने लगते हैं कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है। तो चलिए 'वर्ल्ड नो टॉबेको डे' पर बूरी आदतों से तौबा करेंऔर योग से शरीर को हुए नुकसान की भरपाई करें।
हार्ट प्रॉब्लम
शुगर
लंग्स प्रॉब्लम
माइग्रेन
एंग्जाइटी
डिप्रेशन
युवाओं में बढ़ रहे कैंसर के मामले
कैंसर के 20% मरीज 40 से कम उम्र के
खाने की खराब क्वालिटी कैंसर की बड़ी वजह
अलसी
ब्लूबेरी
पालक
बादाम
अखरोट
काजू
लौंग
सौंफ
इलायची
मुलेठी
दालचीनी
धनिया
250 ग्राम अजवाइन
1 लीटर पानी में पकाएं
खाने के बाद अर्क पीएं
खसखस
मखाना
केसर
हींग
मेथी
हरड़
छुहारा
अजवाइन
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