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ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की देखरेख करेगी सेना? जामिया विश्वविद्यालय की अनदेखी पर सेना सख्त

सोशल मीडिया पर भी कब्र की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि भारत के वीर सपूत की कब्र के साथ तोड़फोड़ हुई है।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Dec 29, 2020 10:57 am IST, Updated : Dec 29, 2020 10:57 am IST
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Image Source : FILE ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की देखरेख करेगी सेना? जामिया विश्वविद्यालय की अनदेखी पर सेना सख्त

पाकिस्तान के खिलाफ 1949 की लड़ाई के हीरो और नौशेरा के शेर के नाम से प्रसिद्ध ​ब्रिगेडियर उस्मान की वीरता की कहानियां आज भी सैनिकों के दिलों में उत्साह भर देती हैं, लेकिन दिल्ली के जामिया मिलिया कब्रिस्तान में उनकी कब्र का हाल देखकर हर किसी का दिल रोने लगेगा। कोरोना काल में अनदेखी के चलते ब्रिग्रेडियन उस्मान की कब्र उजाड़ सी पड़ी है। कब्र के पत्थर भी उखड़ गए हैं। सोशल मीडिया पर भी कब्र की तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें कहा जा रहा है कि भारत के वीर सपूत की कब्र के साथ तोड़फोड़ हुई है। 

दरअसल, हाल ही में एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र टूटी-फूटी दिखाई पड़ रही थी। हालांकि इंडिया टीवी ने जमीनी हकीकत जानने के लिए कब्रिस्तान का दौरा किया और पाया कि कब्र के साथ तोड़फोड़ तो नहीं हुई, लेकिन अनदेखी के चलते यह दुर्दशा का शिकार है। खराब मौसम की वजह से कब्र पर लगे पत्थर उखड़ गए हैं। दरअसल यह कब्र जामिया मिलिया इस्लामिया के कब्रिस्तान में है, लेकिन जामिया प्रबंधन इसकी देखरेख नहीं करता। परिवार के लोग ही इसकी देखरेख करते थे, लेकिन कोरोना संकट के बीच यहां पहुंचा नहीं जा सका।

कब्र की देखरेख करेगी सेना?

ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की स्थिति को देखकर सेना भी चिंतित है। सेना ने जामिया प्रबंधन से ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की ठीक प्रकार देख रेख करने के लिए कहा है। सेना ने ‘हाई-लेवल’ पर विश्वविद्यालय प्रशासन को महावीर चक्र विजेता, ब्रिगेडियर मोहम्मद उसमान की क्रब की मरम्मत करने के लिए कहा है। अगर यूनिवर्सिटी ने ऐसा नहीं किया तो सेना खुद कब्र की मरम्मत कराएगी। यूनिवर्सिटी का कहना है कि ये कब्रिस्तान भले ही यूनिवर्सिटी की जमीन पर है, लेकिन कब्र की देखभाल की जिम्मेदारी परिवार की है।

2018 तक हुए हैं आयोजन 

साल 2014 में भारतीय सेना ने ब्रिगेडियर उसमान ने उनकी शहादत के दिन (3 जुलाई) जामिया मिल्लिया स्थित कब्र पर एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया था, जिसमें पैराशूट रेजीमेंट के वरिष्ठ सैन्य-अधिकारियों ने हिस्सा लिया था। वर्ष 2018 में जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी ने एनसीसी के साथ मिलकर उनकी कब्र पर सर्जिकल-स्ट्राइक दिवस भी मनाया था।

'नौशेरा के शेर' के नाम से प्रसिद्ध हैं ब्रिगेडियर उस्मान 

ब्रिगेडियर उस्मान को 'नौशेरा के शेर' के नाम से भी जाना जाता है। ब्रिगेडियर उस्मान महावीर चक्र से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय सैनिक थे। उनके नेतृत्व में भारतीय सेना ने नौशेरा को अपने अधिकार-क्षेत्र में कर पाकिस्तानी सेना को जबरदस्त नुकसान पहुंचाया था। उसके बाद से ही उन्हें नौसेना का शेर का खिताब दिया गया था। उनकी बहादुरी से परेशान पाकिस्तानी सेना ने उनकी मौत पर ईनाम की घोषणा तक कर दी थी। लेकिन युद्ध के दौरान ही 1949 में पूंछ के झांगड़ इलाके में पाकिस्तानी सेना से लड़ते हुए वे एक तोप के गोले की चपेट में आ गए थे, जिसके चलते उन्होने युद्ध के मैदान में दम तोड़ दिया था। ब्रिगेडियर उसमान के जनाजे में खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू शामिल हुए थे। 

पाकिस्तान ने दिया था सेना प्रमुख बनने का ऑफर 

आजादी के दौरान ब्रिगेडियर उसमान ब्रिटिश सेना की बलूच रेजीमेंट में थे। लेकिन देश के विभाजन के वक्त बलूच रेजीमेंट पाकिस्तानी सेना का हिस्सा बन गई थी। लेकिन ब्रिगेडियर उसमान ने पाकिस्तानी सेना का हिस्सा बनने से इंकार कर दिया था। हालांकि, पाकिस्तान ने उन्हें अपनी सेना का प्रमुख बनाने तक की पेशकश की थी। बाद में वे भारतीय सेना की डोगरा रेजीमेंट से जुड़ गए थे-बाद में डोगरा रेजीमेंट की ये यूनिट पैराशूट रेजीमेंट में तब्दील हो गई थी।

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