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सरकार ने देश में कोरोना मरीजों के लिए प्लाज्मा थेरेपी पर लगाई रोक, AIIMS और ICMR की नई गाइडलाइंस

सरकार ने सोमवार को देश में जारी कोरोना वायरस संकट के बीच इलाज के दौरान संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगा दी है। सरकार ने पाया कि कोविड-19 मरीजों के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों को कम करने में फायदेमंद साबित नहीं हुई।

Edited by: IndiaTV Hindi Desk
Published : May 17, 2021 11:39 pm IST, Updated : May 17, 2021 11:43 pm IST
India drops plasma therapy from COVID-19 management guidelines- India TV Hindi
Image Source : PTI कोरोना वायरस संकट के बीच इलाज के दौरान संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली प्लाज्मा थेरेपी पर रोक।

नयी दिल्ली: सरकार ने सोमवार को देश में जारी कोरोना वायरस संकट के बीच इलाज के दौरान संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगा दी है। सरकार ने पाया कि कोविड-19 मरीजों के उपचार में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों को कम करने में फायदेमंद साबित नहीं हुई। कोविड-19 के लिए गठित राष्ट्रीय कार्य बल-आईसीएमआर की पिछली सप्ताह हुई बैठक के दौरान सभी सदस्य प्लाज्मा थेरेपी को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटाने पर सहमत हुए थे, जिसके बाद सरकार का यह निर्णय सामने आया है। 

प्लाज्मा थेरेपी को कोविड-19 मरीजों के उपचार में प्रभावी नहीं पाया गया है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अधिकारी ने कहा कि कार्य बल ने व्यस्क कोविड-19 मरीजों के लिए उपचार संबंधी नैदानिक परामर्श में संशोधन करते हुए प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया। बता दें कि कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन को देश में कोविड-19 उपचार के लिए प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग को तर्कहीन और गैर-वैज्ञानिक उपयोग करार देते हुए आगाह किया था। 

आईसीएमआर की नई गाइडलाइंस में कोविड मरीजों के इलाज को तीन भागों में बांटा गया है। इसमें हल्के लक्षण वाले मरीज, मध्यम लक्षण वाले और गंभीर लक्षण वाले मरीज शामिल हैं। हल्के लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रहने का निर्देश दिया गया है, जबकि मध्यम और गंभीर संक्रमण वाले मरीजों को क्रमश: कोविड वॉर्ड में भर्ती और आईसीयू में भर्ती करने के लिए कहा गया है।

इससे पहले के दिशा-निर्देशों के तहत लक्षणों की शुरुआत होने के सात दिन के भीतर बीमारी के मध्यम स्तर के शुरुआती चरण में और जरूरतें पूरा करनेवाला प्लाज्मा दाता मौजूद होने की स्थिति में प्लाज्मा पद्धति के इस्तेमाल की अनुमति थी।

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