पेट्रोल और डीजल पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी प्रति लीटर 2 रुपये घटाने के बाद केंद्र ने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वह भी इसी तरह से पेट्रोल और डीजल पर टैक्स कम करे जिससे कि आम आदमी को लाभ मिले। मौजूदा समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का कोई नियन्त्रण नहीं है। तेल की मार्केटिंग करनेवाली कंपनियां रोज कीमतें तय करती हैं। दूसरी बात ये है कि राज्यों की कमाई में पेट्रोल-डीजल से मिलने वाले राजस्व (revenue) का बड़ा हिस्सा है। हर राज्य अपनी नीति के मुताबिक पेट्रोल-डीजल पर लोकल टैक्स लगाते हैं इसलिए राज्य पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने पर सहमत नहीं हुए थे। अब अगर केन्द्र सरकार राज्यों पर पेट्रोल-डीजल पर वैट (VAT) कम करने का प्रेशर डालती है तो इसका असर ये होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो जाएंगी लेकिन ये परमानेंट सॉल्यूशन नहीं हैं। जरूरत इस बात की है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाया जाए ताकि हर राज्य में पेट्रोल का दाम एक जैसा हो।(रजत शर्मा)
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BLOG: पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में लाना चाहिए
अगर केन्द्र सरकार राज्यों पर पेट्रोल-डीजल पर वैट (VAT) कम करने का प्रेशर डालती है तो इसका असर ये होगा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो जाएंगी लेकिन ये परमानेंट सॉल्यूशन नहीं हैं।
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