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भगोड़ों के लिए हर राज्य में स्पेशल जेल बने, रेड नोटिस के बाद पासपोर्ट रद्द किए जाएं: अमित शाह

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
Published : Oct 16, 2025 10:27 pm IST, Updated : Oct 16, 2025 10:27 pm IST

गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए हर राज्य में अंतरराष्ट्रीय मानकों की विशेष जेल बनाने और रेड नोटिस के बाद पासपोर्ट रद्द करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था का डर होना चाहिए और प्रत्यर्पण में तकनीक का पूरा उपयोग हो।

Amit Shah on fugitives, Red Notice passport cancellation, India extradition policy- India TV Hindi
Image Source : PTI केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़ों को भारत वापस लाने और उनके खिलाफ कार्रवाई को और सख्त करने के लिए कई अहम सुझाव दिए हैं। गुरुवार को CBI द्वारा आयोजित ‘भगोड़ों का प्रत्यर्पण-चुनौतियां और रणनीतियां’ विषय पर एक सम्मेलन में उन्होंने कहा कि हर राज्य में भगोड़ों के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विशेष जेल बनाई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इंटरपोल के रेड नोटिस का सामना कर रहे भगोड़ों के पासपोर्ट तुरंत रद्द किए जाएं ताकि उनकी सीमा पार आवाजाही रोकी जा सके और विदेशी अदालतों में उनके प्रत्यर्पण के खिलाफ ‘जेलों की खराब स्थिति’ जैसे बहानों को कमजोर किया जा सके।

'...तब तक हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते'

शाह ने कहा, 'जब तक हम विदेशों से भारतीय अर्थव्यवस्था, हमारी संप्रभुता और हमारी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले भगोड़ों के मन में भारतीय न्याय व्यवस्था के प्रति भय पैदा नहीं करते, तब तक हम देश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकते।' उन्होंने बताया कि वित्तीय अपराध, आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मामलों में भारत के 338 प्रत्यर्पण अनुरोध विभिन्न देशों में लंबित हैं। विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़ों ने विदेशी अदालतों में भारतीय जेलों की स्थिति को लेकर प्रत्यर्पण का विरोध किया है।

'...तो इससे भगोड़ों को वापस लाने में मदद मिलेगी'

गृह मंत्री ने सुझाव दिया कि रेड नोटिस जारी होने पर भगोड़ों के पासपोर्ट को निगरानी सूची में डाला जाए और उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को रोकने के लिए पासपोर्ट रद्द किए जाएं। उन्होंने कहा, 'मौजूदा तकनीक के साथ ऐसा करना कोई मुश्किल काम नहीं है। अगर हम इस प्रावधान को सिस्टम में शामिल कर सकें, तो इससे भगोड़ों को वापस लाने में मदद मिलेगी।' सम्मेलन में सभी राज्य पुलिस प्रमुखों को संबोधित करते हुए शाह ने हर राज्य की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक विशेष जेल बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'भगोड़े विदेशी अदालतों में तर्क देते हैं कि भारत की जेलें मानकों के अनुरूप नहीं हैं और उनके मानवाधिकारों की रक्षा नहीं होगी। मैं इससे सहमत नहीं हूं, लेकिन अगर यह एक बहाना है, तो उन्हें यह मौका क्यों दिया जाए?'

शाह ने भगोड़ों पर  वैज्ञानिक डेटाबेस बनाने का सुझाव दिया

शाह ने भगोड़ों पर एक वैज्ञानिक डेटाबेस बनाने की भी बात कही, जिसमें अपराध का प्रकार, भगोड़े का वर्तमान स्थान, देश में उनके गिरोह और प्रत्यर्पण की स्थिति जैसी जानकारी हो। उन्होंने कहा कि यह डेटाबेस सभी राज्यों के साथ साझा किया जाना चाहिए। केंद्रीय गृह मंत्री ने हर राज्य पुलिस में नार्को, आतंकवाद, वित्तीय और साइबर अपराधों से जुड़े मामलों के लिए एक समन्वय समूह बनाने का सुझाव दिया, जिसे CBI और खुफिया ब्यूरो का सहयोग मिले। साथ ही, प्रत्यर्पण मामलों के लिए हर राज्य में एक विशेष प्रकोष्ठ बनाने की बात कही। उन्होंने कहा,'यह विशेष ज्ञान का क्षेत्र है, जहां आपको अन्य देशों के साथ भारत की संधियों, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनों का अध्ययन कर प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए।'

'अनुपस्थिति में मुकदमा प्रावधान का अधिकतम इस्तेमाल हो'

शाह ने CBI से भी प्रत्यर्पण के लिए एक समर्पित इकाई बनाने और राज्य पुलिस के प्रकोष्ठों का मार्गदर्शन करने को कहा। साथ ही, पासपोर्ट जारी करने वाली एजेंसियों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। गृह मंत्री ने नए आपराधिक कानूनों के तहत शुरू किए गए ‘अनुपस्थिति में मुकदमा’ प्रावधान का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी। इसके तहत भगोड़ों पर भारत में मुकदमा चलाया जा सकता है और दोषी पाए जाने पर वे केवल प्रत्यक्ष उपस्थिति में ही उच्च न्यायालयों में अपील कर सकते हैं। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी कि BNSS का हिस्सा है, जो पुराने ब्रिटिशकालीन कानूनों की जगह ले चुका है।

‘ब्लू नोटिस’ को ‘रेड नोटिस’ में बदलने की प्रक्रिया तेज हो

शाह ने कहा कि प्रत्येक राज्य पुलिस में एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जाए जो इंटरपोल के ‘ब्लू नोटिस’ को ‘रेड नोटिस’ में बदलने की प्रक्रिया को तेज करे। ब्लू नोटिस भगोड़े के ठिकाने की जानकारी के लिए जारी होता है, जबकि रेड नोटिस का उद्देश्य उनकी हिरासत है, जो चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही संभव है। उन्होंने बताया कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण राज्य पुलिस ब्लू नोटिस को रेड नोटिस में अपडेट नहीं कर पाती। इसके लिए सीबीआई और आईबी को बहु-एजेंसी केंद्र के तहत विशेष इकाइयां बनानी चाहिए। बता दें कि इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के पुलिस प्रमुखों ने हिस्सा लिया। शाह ने जोर देकर कहा कि भगोड़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से ही भारतीय न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ेगी और देश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। (PTI)

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