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DRDO का कमाल: 5 साल में देश के इतने पैसे बचाए कि जानकर यकीन नहीं होगा, संसद में आई रिपोर्ट

DRDO ने बड़ा कमाल कर के दिखाया है। रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने जानकारी दी है कि डीआरडीओ ने अपनी स्वदेशी रिसर्च की मदद से देश के बड़े ही भारी-भरकम खर्चे को बचाया है।

Edited By: Subhash Kumar @ImSubhashojha
Published : Dec 11, 2025 09:41 pm IST, Updated : Dec 11, 2025 10:55 pm IST
drdo saved huge money- India TV Hindi
Image Source : DRDO (WEBSITE/X) DRDO ने हासिल की बड़ी कामयाबी। (फाइल फोटो)

भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO का नाम आज पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। रक्षा क्षेत्र में DRDO भारत को नई ऊंचाइंयों तक पहुंचाया है। अब संसद में भी डीआरडीओ की कामयाबी को लेकर चर्चा हुई है। रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने संसद में पेश की गई रिपोर्ट में बड़ी जानकारी दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डीआरडीओ ने बीते 5 साल के दौरान अपने स्वदेशी रिसर्च की वजह से 2,64,156 करोड़ रुपये की राशि बचाने में कामयाबी हासिल की है।

DRDO ने हासिल किए मील के पत्थर

रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बहात पर खुशी जाहिर की है कि बीते साल और इस साल भी डीआरडीओ की ओर से भारत के लिए अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और मिसाइलों को डेवलप करने में अहम मील के पत्थर हासिल किए गए हैं। समिति को ये जानकारी भी दी गई है कि बीते 5 साल के दौरान अपने स्वदेशी अनुसंधान के कारण 2,64,156 करोड़ रुपये की बचत करने में सक्षम रहा है।

समिति ने डीआरडीओ को दी बधाई

रक्षा मामलों की स्थायी समिति ने डीआरडीओ को उसकी अनेक उपलब्धियों के लिए बधाई दी है। समिति ने भरोसा जताया है कि पर्याप्त समर्थन और स्किल्ड मैन पॉवर की मदद से डीआरडीओ भारत के लिए स्वदेशी डिफेंस रिसर्च और विकास की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए विभिन्न जटिल और अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपनी सफल प्रगति जारी रखेगा।

रिपोर्ट में डीआरडीओ की हालिया उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी दी गई है। बताया गया है कि देश की पहली  लंबी दूरी की हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल का नवंबर 2024 में सफल उड़ान परीक्षण किया गया था। इससे पहले मार्च 2024 में अग्नि बैलिस्टिक मिसाइल से पहली मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक के सफल परीक्षण के साथ एक और मील का पत्थर हासिल किया गया। बता दें कि इस सिस्टम की मदद से मिसाइल को अलग-अलग लक्ष्यों पर टारगेट के लिए कई वॉरहेड तैनात किए जाते हैं।

 

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