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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वंतारा ने जारी किया बयान, कहा- "जीवन भर पशु-पक्षियों की रक्षा करुणा के साथ करते रहेंगे"

Edited By: Khushbu Rawal @khushburawal2
Published : Sep 15, 2025 07:43 pm IST, Updated : Sep 16, 2025 02:43 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने SIR की रिपोर्ट के आधार पर गुजरात के प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र वंतारा को क्लीन चिट दे दी है, जिसके बाद वंतारा ने बयान जारी किया है।

vantara- India TV Hindi
Image Source : VANTARA वंतारा का एनिमल हॉस्पिटल और मेडिकल रिसर्च सेंटर 1 लाख वर्गफुट में फैला है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसके आधार पर सर्वोच्च न्यायालय ने गुजरात के प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र वंतारा को क्लीन चिट दे दी है। SIT ने शुक्रवार को ही अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा कर दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस रिपोर्ट का अवलोकन किया। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस पीबी वार्ले ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड्स में शामिल करते हुए बताया कि वंतारा को क्लीन चिट दे दी गई है। इसके बाद वंतारा ने बयान जारी कर कहा है कि हम जीवन भर पशु और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करुणा के साथ करते रहेंगे।

पढ़ें टीम वंतारा का पूरा बयान-

"अत्यंत विनम्रता और कृतज्ञता के साथ, हम भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का स्वागत करते हैं। SIT की रिपोर्ट और माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश यह स्पष्ट करता है कि वंतारा के पशु कल्याण मिशन पर उठाए गए संदेह और आरोप निराधार थे। SIT के प्रतिष्ठित और व्यापक रूप से सम्मानित सदस्यों द्वारा सत्य की पुष्टि न केवल वंतारा के सभी सदस्यों के लिए राहत है, बल्कि एक आशीर्वाद भी है, क्योंकि यह हमारे कार्य को स्वयं बोलने की अनुमति देता है।

SIT की निष्कर्ष और सर्वोच्च न्यायालय का आदेश हमें और अधिक शक्ति और प्रोत्साहन प्रदान करता है ताकि हम उन प्राणियों की सेवा विनम्रता और समर्पण के साथ जारी रख सकें जो स्वयं के लिए बोल नहीं सकते। वंतारा परिवार इस पुष्टि के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करता है और सभी को आश्वस्त करता है कि हम जीवन भर पशु और पक्षियों की रक्षा और देखभाल करुणा के साथ करते रहेंगे।

वंतारा हमेशा प्रेम, करुणा और उन मूक प्राणियों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक रहा है। हर जानवर जिसे हम बचाते हैं, हर पक्षी जिसे हम उपचार देते हैं, हर जीवन जिसे हम बचाते हैं — यह सब हमें याद दिलाता है कि उनका कल्याण हमारे अपने कल्याण से अलग नहीं है, बल्कि मानवता के कल्याण का अभिन्न हिस्सा है। जब हम जानवरों की देखभाल करते हैं, तो हम मानवता की आत्मा की भी देखभाल करते हैं।

हम इस अवसर पर भारत सरकार, राज्य सरकारों और पशु देखभाल के इस विशाल और चुनौतीपूर्ण कार्य में शामिल सभी हितधारकों के साथ अपनी एकजुटता की प्रतिज्ञा करते हैं और यह पुष्टि करते हैं कि वंतारा हमेशा उनके साथ निकट सहयोग में कार्य करने के लिए तैयार रहेगा। आइए हम सब मिलकर धरती माँ को सभी जीवों के लिए एक बेहतर स्थान बनाएं।"

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Image Source : VANTARA
प्राणी बचाव और पुनर्वास केंद्र वंतारा

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया और सोशल मीडिया में आई खबरों तथा गैर सरकारी संगठनों और वन्यजीव संगठनों की विभिन्न शिकायतों के आधार पर वंतारा के खिलाफ अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में चार सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। व्यापक आरोपों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजी प्रतिवादी या किसी अन्य पक्ष से जवाब आमंत्रित करने से कोई खास फायदा नहीं होगा। 

कोर्ट ने कहा था कि सामान्यतः ऐसे निराधार आरोपों पर आधारित याचिका कानूनी तौर पर विचार के योग्य नहीं होती, बल्कि उसे समय रहते खारिज कर दिया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया है कि यह न तो याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर कोई राय व्यक्त करता है और न ही इसे किसी भी वैधानिक प्राधिकरण या वंतारा की कार्यप्रणाली पर कोई संदेह पैदा करने वाला माना जा सकता है। 

जांच का दिया था आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को भारत और विदेश से पशुओं, विशेष रूप से हाथियों को लाने, वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम और उसके तहत चिड़ियाघरों के लिए बनाए गए नियमों के अनुपालन, वनस्पतियों और जीवों की लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय समझौता, आयात-निर्यात कानूनों और जीवित पशुओं के आयात और निर्यात से संबंधित अन्य वैधानिक आवश्यकताओं की जांच करने और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।  

एसआईटी को पशुपालन, पशु चिकित्सा देखभाल, पशु कल्याण के मानकों, मृत्यु दर और उसके कारणों, जलवायु परिस्थितियों के संबंध में शिकायतों और औद्योगिक क्षेत्र के निकट स्थान से संबंधित आरोपों, वैनिटी या निजी संग्रह के निर्माण, प्रजनन, संरक्षण कार्यक्रमों और जैव विविधता संसाधनों के उपयोग के संबंध में शिकायतों के अनुपालन की जांच करने का आदेश दिया गया था।

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