Nishikant Dubey in Aap Ki Adalat | भाजपा के तेजतर्रार सांसद निशिकांत दुबे ने इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के मशहूर शो 'आप की अदालत' में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। दुबे ने राहुल गांधी को “एक गैर-गंभीर व्यक्ति बताया, जिन्हें संसद में बोलते समय प्रॉम्प्ट करने की जरूरत पड़ती है”। भाजपा सांसद ने कहा कि जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे, तब वे राहुल गांधी के भाषणों के दौरान उन्हें प्रॉम्प्ट करते थे। निशिकांत दुबे ने कहा, 'अगर आप मुझसे राहुल गांधी की तुलना प्रियंका गांधी से करने को कहें, तो मैं कहूंगा कि संसद में प्रियंका ज्यादा कॉन्फिडेंट नजर आती हैं। राहुल तो मेरे इस बयान से नाराज भी हैं। अगर उनका व्यवहार ऐसा ही रहेगा, तो वे कांग्रेस पार्टी कैसे चला पाएंगे?'
जब रजत शर्मा ने पूछा कि जब वह नेहरू और एडविना माउंटबेटन और 1962 के भारत-चीन युद्ध से संबंधित किताबें उद्धृत कर रहे थे तो क्या प्रियंका ने उन्हें किताबों में से एक को उल्टे की बजाय सीधे पकड़ने के लिए कहा था, दुबे ने हंसते हुए कहा, 'नहीं, वह शायद परेशान थीं कि कहीं मैं रॉबर्ट वाड्रा का जिक्र न कर दूं । सोनिया गांधी के पास दो काम बचे हैं। एक, अपने बेटे को सेट करना, और दो, अपने दामाद (रॉबर्ट वाड्रा) को भेंट देना। बेटा सेट नहीं हो रहा है और दामाद को जो भेंट दी, वो ईडी, सीबीआई के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन सोनियाजी को भी पता है कि मैंने ये बातें सही कही हैं। उनको लगता है कि कुछ भी हो ये आदमी (दुबे) संसद में सही कहता है।'
निशिकांत दुबे ने आगे कहा, 'जब 2024 में अंतरिम बजट भाषण के बाद सोनिया जी सदन से बाहर आईं, तो मेरी उनसे मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे बताया कि मैं राज्यसभा जा रही हूं। उस दिन उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। जब मैंने उनकी तबीयत के बारे में पूछा, तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर कहा, तुम्हारे जैसे आदमी को पार्लियामेंट में आना चाहिए।'
भाजपा सांसद ने कहा, 'राहुल, जो खुद को भावी प्रधानमंत्री बताते हैं, उन्हें संसद के अंदर फटीचर कपड़े नहीं पहनने चाहिए। स्वदेशी और खादी के लिए प्राणों की आहुति देने वाले हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की आत्माएं मरोड़ती होंगी जब वो राहुल को फटीचर पैंट और टी-शर्ट पहने संसद में देखती होंगी। वो खुद को भावी प्रधानमंत्री बताते हैं। उनके पास रणदीप सुरजेवाला और के.सी. वेणुगोपाल जैसे नेता हैं जो उनके बोलते समय खड़े होकर चिल्लाते हैं। संसद में अपने पूरे कार्यकाल में मैंने कभी कुर्ता और पायजामा के अलावा कोई और कपड़ा नहीं पहना।'
जब रजत शर्मा ने सोशल मीडिया पर उनकी उन तस्वीरों के बारे में पूछा जिनमें वे अरमानी (Armani) सूट और लुई वितों (Louis Vuitton) टी-शर्ट पहने हुए दिख रहे थे, तो दुबे ने जवाब दिया, 'मैंने कब कहा कि मैं गरीब आदमी हूं? मैंने कहा कि संसद के अंदर कैसे कपड़े पहनने चाहिए। यह संसद की गरिमा का सवाल है। निजी जीवन में आप कैसे कपड़े पहनते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन चूंकि वह विपक्ष के नेता हैं, इसलिए संसद की गरिमा मायने रखती है।'
निशिकांत दुबे ने तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर 'सवाल के बदले पैसे' पर चल रहे केस के बारे में विस्तार से बताया। संसद की आचार समिति (Ethics Committee) में शिकायत के बाद ही लोकसभा ने महुआ मोइत्रा को सदन से निष्कासित किया था। दुबे ने खुलासा किया कि उनकी हाल ही में एक शादी में महुआ मोइत्रा से मुलाकात हुई थी और उन्होंने उनसे कई बार बात की थी।
दुबे ने कहा, 'संसद में हम सभी पार्टियों के लोगों से मिलते हैं. चार-पांच लोग उनकी तरफ से मुझ से मिले थे। एक शादी में वो मुझसे मिली थी। मैंने अपने सीनियर नेतृत्व से पूछा कि उनके बारे में क्या किया जाए। मुझे बताया गया कि अब ये पार्टी की लड़ाई है क्योंकि संसद ने फैसला ले लिया है। मेरे वरिष्ठ नेता ने कहा, उनसे बात करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन आपकी छवि ऐसी है, कि पहला, आप बिना कहे ही पार्टी के अनौपचारिक प्रवक्ता बन गए हैं, और दूसरा, आप किसी के साम-दाम-दंड-भेद के बाद भी नहीं रुकेंगे, इसलिए लड़ाई जारी रहेगी। इसीलिए बात आगे नहीं बढ़ी।'
'सवाल के बदले पैसे' के मुद्दे पर, भाजपा सांसद ने महुआ मोइत्रा के बारे में गंभीर भविष्यवाणी की। दुबे ने कहा, 'चूंकि संसद ने आचार समिति की सिफारिश के आधार पर उन्हें निष्कासित किया, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे सही ठहराया, और लोकपाल ने भी इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है, इसलिए जल्द ही आरोप पत्र आ सकता है। अगर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें सात साल की जेल हो सकती है और छह साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जा सकता है। कुल मिलाकर, उनके करियर के लगभग 15 साल बर्बाद हो जाएंगे।'
दुबे ने कहा कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने उनके, उनकी 87 वर्षीय मां, उनकी पत्नी और उनके भाई के खिलाफ कुल 52 मामले दर्ज किए हैं। उन्होंने कहा, 'राज्य सरकार वकीलों की फीस और मुकदमेबाजी पर पहले ही 60-70 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।'
लोकसभा में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए इस आरोप पर कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप देते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने 'सरेंडर' कर दिया था, निशिकांत दुबे ने जवाब दिया, 'भारत सरकार ने तब सरेंडर किया जब उनके पिता (राजीव गांधी) अमेरिका से सुपरकंप्यूटर मांग रहे थे। भारत ने तब सरेंडर किया जब उनकी दादी इंदिराजी ने पीएल-480 कानून के तहत अमेरिका से गेहूं लिया। भारत ने तब सरेंडर किया जब 1961 में झारखंड का चाकुलिया वायुसेना अड्डा अमेरिकी वायु सेना को सौंप दिया गया। भारत ने तब सरेंडर किया जब अमेरिका को हिमालय में नंदा देवी पर परमाणु उपकरण (प्लूटोनियम आइसोटोप जनरेटर) लगाने दिया गया, जिसके कारण उत्तर भारत में गंगा के किनारे रहने वाले लोग आज भी कैंसर से मर रहे हैं। इन सबके मुकाबले, इस व्यक्ति (मोदी) ने अपनी दृढ़ता दिखाई और डोनाल्ड ट्रम्प को भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सहमत होने के लिए मजबूर किया।'
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