महाराष्ट्र सरकार द्वारा त्रिभाषा वाला जीआर रद्द कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे अपनी जीत की तरह पेश कर रहे हैं। अब इस फैसले के बाद राज ठाकरे की पार्टी मनसे (MNS) और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) एक संयुक्त जनसभा करने जा रही है। इस जनसभा का असर महाराष्ट्र की राजनीति पर भी पर सकता है। बता दें कि बीते कुछ समय से ऐसी अटकलें हैं कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे एक साथ आ सकते हैं।
राज-उद्धव की संयुक्त जनसभा के लिए जगह तय कर ली गई है। 5 जुलाई को मुंबई के वरली डोम ऑडिटोरियम में जनसभा होगी। इस जनसभा को 'मराठी विजय दिवस' का नाम दिया गया है। हालांकि, इस जनसभा के दौरान किसी भी पार्टी का न झंडा लगाया जाएगा और न ही पोस्टर। 20 साल बाद राज और उद्धव ठाकरे एक मंच पर दिखाई देंगे। इसलिए इस जनसभा को भव्य बनाने की तैयारी जोर-शोर से की जा रही है। इस जनसभा को कामयाब बनाने के लिए MNS और शिवसेना (UBT) के प्रमुख नेताओं की संयुक्त बैठकें हो रही हैं ताकि को-ऑर्डिनेशन में कोई कमी न रहे।
मनसे और शिवसेना (यूबीटी) की संयुक्त जनसभा को लेकर राज ठाकरे ने सोमवार को बयान जारी किया था। उन्होंने कहा- "कल सरकार के फैसला रद्द करने के बाद मुझे संजय राउत का फ़ोन आया था। उन्होंने मुझे कहा अब आगे क्या करना है? मैंने उन्हें कहा अब मोर्चा तो रद्द ही करना होगा। उन्होंने कहा क्या हम 5 जुलाई को विजयी सभा कर सकते हैं? मैंने कहा हां बिल्कुल कर सकते हैं। मैंने कहा 5 जुलाई को विजयी उत्सव सभा करेंगे पर अभी आप सभा की जगह मत घोषित कीजिए। मुझे अपने नेताओं के साथ बात करनी होगी, उनसे बात कर हम तय करेंगे। विजयी सभा तो होगी पर आप इसमें कोई राजनीतिक बैनर मत लगाएं। यह कोई राजनीतिक सभा नहीं होगी, ग़ैर राजनीतिक सभा होगी। मराठी मानुष की एकता की जीत हुई है, यह मराठी की जीत है।"
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