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'GST की बात कर रहे... अच्छा होता पीएम मोदी जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य के दर्जे की बात करते'- फारूक अब्दुल्ला

 Published : Sep 22, 2025 05:28 pm IST,  Updated : Sep 22, 2025 05:35 pm IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम को देश के नाम संबोधन किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जीएसटी दरों में हुए बदलाव के फायदे गिनाए। इस पर अब नेशनल कांफ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया सामने आई है।

पीएम मोदी और फारूक अब्दुल्ला- India TV Hindi
पीएम मोदी और फारूक अब्दुल्ला Image Source : PTI-FILE PHOTO

नेशनल कांफ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की बात करनी चाहिए थी। पीएम मोदी ने रविवार शाम अपने संबोधन में लोगों को जीएसटी सुधार के फायदे बताए। संशोधित जीएसटी दरें सोमवार से लागू हुईं हैं। 

राज्य का दर्जा बहाल होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं लोग

अब्दुल्ला ने कहा, ‘आप जीएसटी की बात कर रहे हैं, अच्छा होता अगर आपने ( पीएम मोदी) अपने संबोधन में हमारे राज्य के दर्जे पर बात की होती।’ जब उनसे पूछा गया कि क्या नेशनल कांफ्रेंस को सुप्रीम कोर्ट से अनुकूल फैसले की उम्मीद है, तो अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का हर नागरिक राज्य का दर्जा बहाल होने की उम्मीद लगाए बैठा है।

अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में होगी सुनवाई

राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर याचिका अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। उन्होंने कहा, ‘सिर्फ नेशनल कांफ्रेंस ही नहीं, बल्कि सभी को उम्मीद है कि हमें फिर से राज्य का दर्जा मिलेगा।’ 

जानिए यानिस मलिक के बार में क्या बोले अब्दुल्ला

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के अध्यक्ष यासीन मलिक के मुकदमे से संबंधित एक सवाल पर पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कहा कि यह अदालत का विषय है। उन्होंने कहा, ‘फैसला अदालत करती है। अदालत ही तय करेगी। हमारी इसमें कोई भूमिका नहीं है।’ 

उम्रकैद की सजा काट रहा है मलिक

मलिक को फरवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था और वह आतंकवाद को वित्तपोषित करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। उस पर कई मामले लंबित हैं, जिनमें 1990 में रुबैया सईद के अपहरण और रावलपोरा में वायुसेना के कर्मियों पर हमले का मामला भी शामिल है। 

हमें नहीं हटना है पीछे- अब्दुल्ला

अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर में शासन व्यवस्था को ‘उस्तरे की धार पर चलने जैसा’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘लेकिन हमें उस पर चलना है और पीछे नहीं हटना है।’ (भाषा के इनपुट के साथ)

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