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पुतिन और मोदी ने मिलाया दिल्ली में हाथ, UNSC में भारत ने निभाया रूस का साथ; अमेरिका से यूरोप तक को लगा करंट

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Dec 04, 2025 11:59 pm IST, Updated : Dec 05, 2025 12:01 am IST

रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने यूएनएससी में पेश किए गए इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रस्ताव "झूठे आरोपों का जाल" है और "निरर्थक मिथ्याओं" से भरा हुआ है। उन्होंने इसे "शांति वार्ताओं के बीच बाधा" करार दिया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और पीएम मोदी। - India TV Hindi
Image Source : PTI रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और पीएम मोदी।

संयुक्त राष्ट्र: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन 2 दिवसीय दौरे पर भारत में हैं। पीएम मोदी ने बृहस्पतिवार को प्रोटोकॉल तोड़कर पालम एयरपोर्ट से उनको रिसीव किया। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से हाथ मिलाए और फिर गले मिले। इसके बाद एक ही कार से प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। इधर रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन से जुड़ा एक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव से दूरी बनाकर भारत ने अपने दोस्त रूस का बखूबी साथ निभाया। भारत के इस कदम से अमेरिका से यूरोप तक को तगड़ा झटका लगा है। 

क्या था मामला

संयुक्त राष्ट्र में रूस के खिलाफ यूक्रेनी बच्चों की शीघ्र वापसी को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया। मगर भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान से परहेज किया। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा के 11वें आपातकालीन विशेष सत्र में बुधवार को पेश किया गया है। इसके तहत तथाकथिक रूप से जबरन रूस लाए गए "यूक्रेनी बच्चों की वापसी" मांग की गई थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि रूस जबरन स्थानांतरित या निर्वासित सभी यूक्रेनी बच्चों की तत्काल, सुरक्षित और बिना शर्त वापसी सुनिश्चित करे। 193 सदस्यीय महासभा में इस प्रस्ताव के पक्ष में 91 वोट पड़े, विपक्ष में 12 तथा 57 देशों ने मतदान में भाग नहीं लिया या अनुपस्थित रहे। यह प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित हुआ, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 18 के तहत आवश्यक है। 

भारत ने बनाई मतदान से दूरी

भारत ने रूस के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव से दूरी बनाकर मॉस्को का समर्थन किया। भारत के अलावा कुल 57 देशों ने रूस के खिलाफ होने वाले इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इस सूची में बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका तथा कई अन्य विकासशील राष्ट्र शामिल थे। भारत की इस स्थिति को उसके तटस्थ रुख के अनुरूप माना जा रहा है, जो यूक्रेन युद्ध में शांति वार्ताओं को प्राथमिकता देता है। विपक्षी देशों में रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया तथा सीरिया प्रमुख थे, जिन्होंने प्रस्ताव को "झूठे आरोपों" के आधार पर खारिज किया और विपक्ष में मतदान किया। 


क्या थी मुख्य मांगें

रूस के खिलाफ लाए गए इस प्रस्ताव की मुख्य मांगों में यूक्रेन से जबरन रूस स्थानांतरित किए गए यूक्रेनी बच्चों की तत्काल वापसी सुनिश्चित करने के अलावा, परिवारों से अलगाव, नागरिकता परिवर्तन, गोद लेना, फोस्टर केयर या प्रचार-प्रसार जैसी प्रक्रियाओं को तुरंत रोकने की अपील की गई है। शामिल है। यह प्रस्ताव 2014 में रूस ने क्रीमिया का विलय होने से लेकर अब तक चली आ रही घटनाओं पर केंद्रित है, जिसमें रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों के भीतर स्थानांतरण और रूस में निर्वासन दोनों का मामला शामिल है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने गहरा दुख जाहिर करते हुए रूस की ऐसी कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

यूक्रेन ने लगाया आरोप

यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेत्सा ने सत्र में प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक जबरन स्थानांतरित किए बच्चों की संख्या 6,395 है, जबकि कुल 20,000 से अधिक मामलों की जांच चल रही है। उन्होंने इसे राज्य-प्रायोजित इतिहास की सबसे बड़ी अपहरण कार्रवाई" करार दिया। साथ ही कहा कि "हमारे बच्चे सौदेबाजी के विषय नहीं हैं। यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर समझौता नहीं होगा।" यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की की "ब्रिंग किड्स बैक" पहल के तहत अब तक 1,859 बच्चों को वापस लाया गया है, लेकिन कई को मनोवैज्ञानिक पुनर्वास की आवश्यकता है। बेत्सा ने रूस पर आरोप लगाया कि वह बच्चों को "युवा सेनाओं" में भर्ती कर सैन्य प्रशिक्षण और प्रचार दे रहा है। (भाषा)

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