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सीमेंट और केमिकल मिलाकर बना दिया नकली जीरा, पुलिस ने जब्त की 46 बोरियां

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Jan 31, 2026 06:52 pm IST,  Updated : Jan 31, 2026 06:52 pm IST

आरोपी एक जीरा कारोबारी के ब्रांड की नकल कर नकली जीरा बना रहा था और बाजार में सप्लाई कर रहा था। असली मालिकों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है और आरोपियों को पकड़ा है।

Fake Jeera- India TV Hindi
सौंफ से बना नकली जीरा Image Source : REPORTER INPUT

ग्वालियर शहर के बहोड़ापुर थाना इलाके में मानव जीवन के साथ खिलवाड़ कर देने वाली तस्वीरें सामने आई है। यहां चंद मुनाफे के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हुए खाने में इस्तेमाल होने वाले जीरे को गलत तरीके से तैयार किया जा रहा था। यह जीरा सौंफ पर सीमेंट और रसायन का लेप लगाकर बनाया जा रहा था। जब पुलिस को नकली जीरा बनाने वाले कारोबारियों की भनक लगी तो पुलिस ने कार्रवाई की। 

पुलिस ने मेहसाणा गुजरात के रहने वाले विमल कुमार पटेल की शिकायत पर शिव पुजारी ब्रांड के नकली जीरे से भरी 46 बोरियों को जप्त किया है। जिन तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें हितेश सिंघल, मनोज और टीटू अग्रवाल शामिल है।

मार्केट में मौजूद नकली जीरा की तलाश कर रही पुलिस

आरोपी टीटू झांसी का रहने वाला बताया गया है। बहोडापुर पुलिस ने ट्रांसपोर्ट नगर में यह कार्रवाई शुक्रवार देर शाम की है। शिव पुजारी ब्रांड के हूबहू पैकेजिंग सामग्री छपवाकर घटिया क्वालिटी का जीरा उनके नाम से बेचा जा रहा था। इसकी शिकायत मेहसाणा के कारोबारी विमल कुमार ने की थी। पुलिस अब पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही मार्केट में खपाए गए नकली जीरा को लेकर जानकारी हासिल कर रही है।

पकड़े गए जीरे की कीमत 1.5 लाख से ज्यादा

पकड़े गए जीरे की अनुमानित कीमत 2.5 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। पुलिस ने कोल्ड स्टोर के मालिक समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है, लेकिन एक आरोपी फरार है। यह नकली जीरा लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक था, क्योंकि सीमेंट और केमिकल से बनी चीज खाने से पेट, लीवर, किडनी आदि को गंभीर नुकसान हो सकता है।

कैसे करें असली जीरे की पहचान

असली जीरा हाथ में रगड़ने पर अच्छी खुशबू देता है, रंग नहीं छोड़ता। वहीं पानी में डालने पर असली जीरा डूब जाता है। वहीं, नकली जीरा अक्सर तैर सकता है या रंग छोड़ सकता है। नकली सामान से बचने के लिए हमेशा FSSAI प्रमाणित ब्रांड के उत्पाद ही खरीदें और संदेह होने पर लोकल फूड सेफ्टी विभाग को सूचित करें।

 

 

 

(ग्वालियर से भूपेन्द्र भदौरिया की रिपोर्ट)

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