मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक विधायक ने कथित अवैध खनन से जुड़े एक मामले को लेकर हाई कोर्ट के एक जज से संपर्क करने का प्रयास किया। इसके बाद जज ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। जज विशाल मिश्रा ने एक सितंबर फैसले में खुलासा किया कि संजय पाठक (विधायक) ने उन्हें इस विशेष मामले के बारे में चर्चा के लिए बुलाने का प्रयास किया था।
मामले को चीफ जस्टिस के पास रखा जाए- जज
उन्होंने कहा, 'इसलिए, मैं इस रिट याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हूं।' फैसले में कहा गया है, 'मामले को विचार के लिए उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाए।'
अवैध खनन में शामिल हैं विधायक की तीन कंपनियां
आशुतोष दीक्षित नाम के एक व्यक्ति की ओर से यह रिट याचिका दायर की गई थी, जिसमें अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया है कि भाजपा विधायक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र में 'अवैध और अत्यधिक खनन' में शामिल हैं।
हाई कोर्ट में दायर की गई रिट याचिका
दीक्षित ने कहा, 'हालांकि ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) ने मेरा बयान दर्ज कर लिया है, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके बाद मैंने हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें मैंने जांच एजेंसी को जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।'
मामले में 1,700 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना
याचिका के लंबित रहने के दौरान सरकार ने विधानसभा को सूचित किया था कि उसने कार्रवाई की है। याचिका में दावा किया गया है कि मामले में 1,700 करोड़ रुपये से अधिक का भारी जुर्माना लगाया गया है। इस बीच, विधायक की कंपनी ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर की, जो न्यायमूर्ति मिश्रा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।
विधायक ने नहीं उठाया फोन
कटनी जिले में विजयराघवगढ़ निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक पाठक ने शुरू में प्रतिक्रिया के लिए ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा किए गए फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। (भाषा के इनपुट के साथ)