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मुंबई में संघ के 'शताब्दी उत्सव' में फिल्मी सितारे भी पहुंचे, नजर आए सलमान, अक्षय, जैकी श्रॉफ

 Reported By: Sameer Bhaudas Bhise Edited By: Niraj Kumar
 Published : Feb 08, 2026 03:18 pm IST,  Updated : Feb 08, 2026 03:18 pm IST

मुंबई में आर एस एस की ओर से "संघ यात्रा के 100 वर्ष नए क्षितिज" इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन नेहरू सेंटर में हो रहा है। आज दूसरे दिन समाज के विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियां भी शामिल हुईं। इस दौरान बॉलीवुड स्टार सलमान खान, अक्षय कुमार, जैकी श्राफ भी नजर आए।

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जैकी श्राफ, अक्षय कुमार, सलमान खान Image Source : REPORTER INPUT AND PTI

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत संगठन के शताब्दी वर्ष समारोहों के तहत मुंबई में विशेष संवाद किया। इस संवाद में समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। वहीं बॉलीवुड स्टार भी इस संवाद में शिरकत करते नजर आए। सलमान खान, अक्षय कुमार, जैकी श्राफ, विक्की कौशल जैसे अभिनेता भी इसमें शामिल हुए। संघ प्रमुख ने संघ की कार्यप्रणाली, भविष्य की दिशा और सामाजिक समरसता पर खुलकर अपनी राय रखी।

आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं 

इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल को लेकर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर संघ उन्हें पद से हटने के लिए कहेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे और इस संगठन ने ही उनसे उनकी उम्र के बावजूद काम जारी रखने के लिए कहा है। भागवत ने कहा, ''आरएसएस प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की उम्र के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''मैंने 75 वर्ष पूरे कर लिए और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने को कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।'' 

समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि परिस्थितियां सहायक या प्रतिकूल हो सकती हैं और उन पर ज्यादा ध्यान देने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ''हमें समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय समाधान खोजने पर ध्यान देना चाहिए। जब ​​तक सच्चाई सामने नहीं आती, भ्रम बना रहता है।'' भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ''अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है'' और उन्होंने दावा किया कि आरएसएस के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो। 

संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है

उन्होंने कहा कि संघ का काम संस्कारों को बढ़ावा देना है, न कि चुनाव प्रचार करना। उन्होंने कहा, ''हम अपने प्रचार-प्रसार में पिछड़ गए हैं। अत्यधिक प्रचार से प्रसिद्धि तो मिलती है, लेकिन फिर अहंकार भी आ जाता है। इससे बचाव करना जरूरी है। प्रचार बारिश की तरह होना चाहिए, यानी समय और मात्रा दोनों में उचित होना चाहिए।'' उन्होंने कहा कि RSS जनसंपर्क अभियान चला रहा है। भागवत ने कहा कि RSS के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है। उन्होंने कहा, ''हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं। जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका उपयोग करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है।'' 

संघ प्रमुख ने कहा कि लोगों को इस तरह से अंग्रेजी बोलनी आनी चाहिए कि अंग्रेजी भाषी लोग उसे सुनना चाहें। भागवत ने कहा, ''हमें अंग्रेजी में महारत हासिल करनी चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा को भूल जाएं।'' बेंगलुरु में हुई इसी तरह की एक बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कई दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधि हिंदी नहीं समझ पा रहे थे और उन्होंने उनके सवालों का जवाब अंग्रेजी में दिया था। संघ प्रमुख भागवत ने कहा कि विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों से बातचीत के दौरान संवाद या तो हिंदी में होता है या उनकी मातृभाषा में, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे अंग्रेजी बोलने वाले देशों से हैं या गैर-अंग्रेजी भाषी।

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