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मणिपुर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता, 6 जिलों से 104 हथियार और गोला-बारूद बरामद

Edited By: Shakti Singh Published : Feb 27, 2025 09:53 am IST, Updated : Feb 27, 2025 09:53 am IST

मणिपुर में हिंसा के चलते लंबे समय से अशांति बनी हुई है। राज्य में कानून व्यवस्था लागू करने में नाकाम रहने के कारण मुख्यमंत्री इस्तीफा भी दे चुके हैं। इस बीच राज्य के छह जिलों से 104 हथियार बरामद हुए हैं।

Weapons- India TV Hindi
Image Source : X/MANIPURPOLICE बरामद हथियारों के साथ पुलिसकर्मी

हिंसा से प्रभावित उत्तर भारतीय राज्य मणिपुर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने गुरुवार को बताया कि संघर्ष प्रभावित मणिपुर के छह जिलों में लोगों ने स्वेच्छा से कुल 104 हथियार और गोलाबारूद जमा किए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये हथियार कांगपोकपी, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल, इंफाल पश्चिम और काकचिंग जिलों में बुधवार को जमा किए गए। यह समय सीमा अधिकारियों द्वारा हथियार जमा करने के लिए दी गई सात दिन की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले थी। 

मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने 20 फरवरी को संघर्ष प्रभावित राज्य के लोगों से सात दिनों के भीतर लूटे गए और अवैध रूप से रखे गए हथियारों को स्वेच्छा से जमा करने का आग्रह किया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि इस अवधि के दौरान हथियार जमा करने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। 

अब कार्रवाई करेंगे सुरक्षाबल

मुख्य सचिव पीके सिंह ने 23 फरवरी को कहा था कि अगर कोई व्यक्ति हथियार जमा करना चाहता है तो स्वेच्छा से हथियार जमा करने के लिए दिया गया सात दिन का समय पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के समाप्त होने के बाद सुरक्षा बल ऐसी बंदूकें बरामद करने के लिए कार्रवाई करेंगे। मई 2023 से इम्फाल घाटी स्थित मैतेई और आसपास के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।

13 फरवरी से लागू है राष्ट्रपति शासन

केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था, जिसके कुछ दिनों बाद मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे पूर्वोत्तर राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा हो गई थी। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है। मणिपुर में मौजूदा विधायकों का कार्यकाल 2027 तक है। राज्य में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है। ऐसे में पार्टी नए मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ फिर से सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। (इनपुट- पीटीआई भाषा)

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