ब्यावरः ब्यावर का ऐतिहासिक बादशाह मेला आज खुशीयों का उल्लास मातम में बदल गया। बादशाह की सवारी जब महादेव जी की छत्री पर पहुंची तब गुलाल के गुलछर्रे आओ बादशाह…आओ बादशाह..डीजे की धुन पर उल्लास से पूरा मेला सराबोर था। पुरातन परंपरा का निर्वहन करते बादशाह भी अपनी रियाया को गुलाल के रूप में खर्ची लुटा रहे थे। लेकिन बादशाह बने चन्द्रप्रकाश अग्रवाल की अचानक तबियत बिगड़ गई। मेला मार्ग पर ही एम्बुलेंस से अमृतकौर अस्पताल ले जाया गया। अमृतकौर के चिकित्सकों ने उन्हें यथासंभव CPR दिया लेकिन डॉक्टरों के अधिक प्रयास के बाद भी चंद्रप्रकाश की जान नहीं बचाई जा सकी और उन्हें डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मेले में पसरा मातम
यह समाचार सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हुआ और खुशी ओर उल्लास का मेला ग़मज़दा मातम में तब्दील हो गया। पूरे बाजार में लगाये गये डीजे बंद कर दिया गया। मेला में आए लोगों ने गुलाल की थैलियों को फेंक दिया। गुलाली जश्न रंज और वेदना का मेला बन गया।
मरने से पहले चंद्रशेखर अग्रवाल ने दिया था आखिरी संदेश
समापन पर जिला कलेक्टर कार्यालय पर बादशाह द्वारा खेली जाने वाली गुलाल नहीं खेली गयी। केवल औपचारिक रूप से फरमान सुनाया गया। आनन फ़ानन में बादशाह मेला रोक दिया गया। ब्यावर के इतिहास मे हतभ्रत कर देने वाली घटना सुनकर हर कोई आहत है लेकिन इस घटनाक्रम के बाद पूरे ब्यावर की आंखों में आंसू दे गया। किसे मालुम था कुछ घंटों पहले बड़े ही उल्लास के साथ बादशाह को ट्रक मैं विराजमान करवाया गया लेकिन बादशाह सवारी अपना मुकाम के आधे रास्ते में ही ब्यावर के बादशाह ने ब्यावर वासियों कों अलविदा कह दिया। चंद्र प्रकाश ने सवारी निकलने के पहले एक मैसेज दिया था और ब्यावर वासियों को धन्यवाद किया था कि आज में बादशाह बन रहा हूं।
रिपोर्ट- राजकुमार वर्मा, अजमेर
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