राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी में एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में भारी हिंसा और झड़प देखने को मिली है। मौके पर 20 से ज्यादा गाड़ियां जलाई गईं हैं जिनमें अधिकांश गाड़ियां पुलिस की हैं। अब इस घटना को लेकर कई बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस ने बताया है कि उपद्रव फैलाने की साजिश रची गयी थी और पंजाब व हरियाणा से लोग बुलाए गए थे। बता दें कि पुलिस ने इस मामले में अब तक 100 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
कैसे भड़की हिंसा?
जानकारी के मुताबिक, जिस जगह फैक्ट्री लगाई जानी है उस जगह चारों तरफ़ से विरोध करने वाले ट्रेक्टर लेकर टूट पड़े। तमाम गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया, बाइकों को मशीनों को तोड़ा गया। बताया जा रहा है कांग्रेस का विधायक अभिमन्यु पुनिया ने मंच संभाला , माकपा के नेता आए और पंजाब हरियाणा से विरोध करने वालों को बुलाया गया, मौके पर ऑफिस को आग के हवाले कर दिया गया और गाड़ियां जला दी गयी।
उपद्रव फैलाने की साजिश रची गयी- पुलिस
हनुमानगढ़ में हुई हिंसा को लेकर ADG वीके सिंह ने बताया- "टिब्बी में उपद्रव फैलाने की साजिश रची गयी। पंजाब हरियाणा से लोग बुलाए गए। पूरे मामले को पोलिटिकली मोटिवेटेड किया गया। 100 लोगों के ख़िलाफ मामला दर्ज किया गया है। हमने किसानों पर कोई बल प्रयोग नहीं किया। किसान हमारे लिए सर्वोपरि है। ये प्लांट किसानों के हक में है विरोध में नहीं।"
यहां समझें पूरा मामला
असल में ये सारा हंगामा हनुमानगढ़ में लग रही एथेनॉल फैक्ट्री के विरोध में हो रहा है। चंडीगढ़ की ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, हनुमानगढ़ के टिब्बी इलाक़े में एथेनॉल फैक्ट्री लगा रही है। किसान इसके खिलाफ हैं। एक साल से एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का विरोध हो रहा है। किसान,सितंबर 2024 से धरना दे रहे थे। सरकार ने वादा किया था कि किसानों की चिंताओं को दूर किए बग़ैर फैक्ट्री नहीं लगेगी। लेकिन, एक महीने पहले नवंबर में किसानों को जबरदस्ती धरने से हटा दिया गया जिसके बाद कंपनी ने फैक्ट्री की दीवार बनानी शुरू की। इससे भड़के किसानों ने फिर से आंदोलन शुरू कर दिया लेकिन प्रशासन ने फैक्ट्री की सुरक्षा के लिए भारी तादाद में फ़ोर्स तैनात कर दी।
19 नवंबर को कई किसान नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया तो किसानों की नाराज़गी बढ़ गई। पूरे राजस्थान से किसान नेता हनुमानगढ़ पहुंचने लगे। बुधवार को दोपहर में किसानों ने SDM ऑफ़िस के सामने बड़ी सभा की लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई किसानों के साथ बातचीत के लिए नहीं आया। इसके बाद किसानों ने फैक्ट्री पर धावा बोल दिया।
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