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वसुंधरा राजे ने BJP के विरोध प्रदर्शन से किया किनारा, फिर से पार्टी के भीतर दिखी दरार

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Feb 16, 2022 03:42 pm IST,  Updated : Feb 16, 2022 03:42 pm IST

बीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में कुल 68 विधायक और 18 सांसदों ने हिस्सा लिया। विधानसभा में पार्टी की ताकत 72 है और संसद में 25 सदस्य हैं। नदारद रहने वाले चार विधायकों में राजे के साथ उनके भरोसेमंद कालीचरण सराफ, प्रताप सिंह सिंघवी और कैलाश मेघवाल शामिल थे।

Vasundhara Raje- India TV Hindi
Vasundhara Raje Image Source : PTI

जयपुर: राजस्थान भाजपा के भीतर मतभेद एक बार फिर तब सामने आ गए, जब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे राजस्थान अध्यापक भर्ती पात्रता परीक्षा (REET) के पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर पार्टी द्वारा किए जा रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन से दूर रहीं। इस प्रदर्शन में कुल 68 विधायक और 18 सांसदों ने हिस्सा लिया। विधानसभा में पार्टी की ताकत 72 है और संसद में 25 सदस्य हैं। नदारद रहने वाले चार विधायकों में राजे के साथ उनके भरोसेमंद कालीचरण सराफ, प्रताप सिंह सिंघवी और कैलाश मेघवाल शामिल थे।

भाजपा सूत्रों ने कहा कि मंगलवार को हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके सांसद या तो चुनावी राज्यों में प्रचार कर रहे हैं या फिर उनकी तबीयत खराब है। इस विशाल विरोध प्रदर्शन में राजे और अन्य वरिष्ठ विधायकों की अनुपस्थिति शहर के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गई है।

प्रदेश भाजपा ने REET मामले में सीबीआई जांच की मांग को लेकर विधानसभा घेराव का आह्वान किया था और प्रदर्शन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, प्रभारी अरुण सिंह, नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु शर्मा, महिला मोर्चा, जयपुर शहर और देहात भाजपा, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, कई मोचरें के कार्यकर्ता, विधायक और सांसद ने किया।

राजे ने बजट सत्र की शुरूआत में अपने बेटे सांसद दुष्यंत सिंह के घर पर पथराव किए जाने पर पार्टी की चुप्पी पर नाखुशी जाहिर की थी। उन्होंने तब पूछा था कि जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के काफिले पर हमला हुआ, तो पार्टी विरोध क्यों कर रही थी।

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि रीट मामले में सीबीआई जांच की मांग करने और कांग्रेस पार्टी पर टिप्पणी करने के बाद पूनिया की कार पर हमला किया गया था। बता दें कि राज्य का नेतृत्व पूनिया के हाथों में दिए जाने के बाद से राजे पार्टी की अधिकांश बैठकों और कार्यक्रमों से दूर रही हैं।

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