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Bhoot Chaturdashi 2025: आज है भूत चतुर्दशी, जानिए कहां और कैसे मनाया जाता है ये त्योहार, इस दिन किसकी पूजा होती है

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Oct 19, 2025 08:17 am IST,  Updated : Oct 19, 2025 08:19 am IST

Bhoot Chaturdashi 2025: भूत चतुर्दशी को काली चौदस या नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ता है। इस दिन बुरी आत्माओं को दूर करने और पूर्वजों की आत्मा को शांति देने के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं।

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भूत चतुर्दशी 2025 Image Source : CANVA

Bhoot Chaturdashi 2025: भूत चतुर्दशी का त्योहार मुख्य रूप से पश्चिमी राज्यों में मनाया जाता है। इस दिन मां काली की पूजा की जाती है। इसलिए इसे काली चौदस (kali Chaudas) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन मध्यरात्रि के समय श्मशान जाकर अंधकार की देवी और वीर वेताल की पूजा करने का विधान है। इस साल ये त्योहार 19 अक्टूबर 2025 को मनाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में इसे 'इंडियन हैलोवीन' के रूप में भी मनाया जाता है। चलिए जानते हैं भूत चतुर्दशी पूजा का मुहूर्त और विधि।

भूत चतुर्दशी या काली चौदस 2025 (Bhoot Chatudashi 2025 Date And Time)

  • काली चौदस - 19 अक्टूबर 2025, रविवार
  • काली चौदस मुहूर्त - 11:41 PM से 12:31 AM, अक्टूबर 20
  • चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - अक्टूबर 19, 2025 को 01:51 PM बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त - अक्टूबर 20, 2025 को 03:44 PM बजे

बंगाल में भूत चतुर्दशी कैसे मनाई जाती है (Bhoot Chaturdashi Kaise Manate Hai)

भूत चतुर्थी के दिन, बंगाल के लोग सुबह जल्दी उठकर सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं और फिर शाम को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस दिन भगवान यमराज, मां काली, श्री कृष्ण, भगवान शिव, हनुमान, और विष्णु जी की पूजा की जाती है। इस दिन भूतों और आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

भूत चतुर्दशी का विशेष अनुष्ठान (Bhoot Chaturdashi Upay)

इस दिन भूतों के प्रकोप से बचाव के लिए लोग सूर्योस्त के बाद घरों में 14 मिट्टी के दीपक जलाते हैं जिन्हें ‘चोड्डो प्रोदीप’ कहते हैं। इन दीपों को घर के दरवाजों, खिड़कियों के बाहर, तुलसी के पौधे के पास और अन्य जगहों पर रखा जाता है।

भूत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है? (Bhoot Chaturdashi Kyu Manate Hai)

धार्मिक मान्यताओं अनुसार भूत चतुर्दशी की पूजा करने से बुरी शक्तियां और नकारात्मक आत्माएं घर-परिवार से दूर रहती हैं। साथ ही पूर्वजों की आत्माओं को भी शांति मिलती है। ऐसा भी माना जाता है कि इस दिन बुरी शक्तियां और आत्माएं काफी सक्रिय रहती हैं और ऐसे में घरों में माता काली की पूजा से ये नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पाती।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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