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Holashtak 2026 Start Date: होलाष्टक किस दिन से लग रहा है, कौन से 10 काम इन 8 दिनों में नहीं करने चाहिए?

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Feb 18, 2026 02:26 pm IST,  Updated : Feb 18, 2026 02:30 pm IST

Holashtak 2026 Start Date: होली से पहले होलाष्टक लग जाता है। जिसकी शुरुआत फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और समापन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होता है। जानिए इस साल होलाष्टक कब से लग रहा है और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए।

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होलाष्टक किस दिन से लग रहा है 2026 Image Source : PTI

Holashtak 2026 Start Date: होली से पहले के 8 दिनों को होलाष्टक के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार इन दिनों में ग्रहों का प्रभाव काफी उग्र रहता है, इसलिए इस दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। होलाष्टक से लोग होलिका दहन की लकड़ियां और सामग्रिया एकत्रित करना शुरू कर देते हैं। होलाष्टक भले ही अशुभ घड़ी हो लेकिन इन दिनों किए गए जप, तप और दान जैसे आध्यात्मिक कार्यों का खूब पुण्य प्राप्त होता है। चलिए आपको बताते हैं इस साल होलाष्टक कब से लग रहा है और इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए।

होलाष्टक 2026 कब से शुरू होगा? (Holashtak 2026 Start Date)

होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी 2026 से होगी और इसका समापन होलिका दहन के दिन यानी 3 मार्च 2026 को होगा। फिर इसके अगले दिन रंगवाली होली खेली जाएगी।

होलाष्टक में वर्जित कार्य (Holashtak Mein Kya Nahi Karna Chahiye)

  1. शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य
  2. गृह प्रवेश
  3. नया व्यवसाय शुरू करना
  4. सगाई, रोका समारोह और बहू-बेटी की विदाई करना
  5. नया घर या वाहन खरीदना
  6. मुंडन संस्कार
  7. नई नौकरी जॉइन करना
  8. बड़ा शुभ यात्रा आरंभ करना
  9. भूमि पूजन
  10. महत्वपूर्ण निवेश करना

होलाष्टक क्यों होता है अशुभ (Holashtak Kya Hota Hai)

धार्मिक मान्यताओं अनुसार होलाष्टक हमें उस समय की याद दिलाता है जब भक्त प्रह्लाद को उनके पिता हिरण्यकश्यप ने 8 दिनों तक खूब प्रताड़ित किया था। जिससे वो भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ दे। लेकिन भक्त प्रह्लाद ने तब भी अपनी भक्ति नहीं छोड़ी और वे निरंतर भगवान विष्णु की उपासना करते रहे। जब इतनी यातनाएं देने के बाद भी प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ तब हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को उसे मारने की जिम्मेदारी दी। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका, जिसे अग्नि में न जलने का वरदान था वो खुद आग में जलकर भस्म हो गई और भक्त प्रह्लाद का बालबांका भी न हुआ। कहते हैं तभी से होलिका दहन का पर्व मनाया जाने लगा और इसके पहले के 8 दिनों को होलाष्टक के नाम से जाना जाने लगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति अनुकूल नहीं होती है। इसलिए इन दिनों शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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