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Premanand Maharaj: बचपन में इस खेल के शौकीन थे प्रेमानंद महाराज तो खाने में ये चीज लगती थी सबसे अच्छी

Premanand Maharaj: हाल ही में प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने सवाल किया कि महाराज जी आपको बचपन में सबसे ज्यादा क्या पसंद था। इस पर महाराज जी ने अपने प्रिय खेल से लेकर खाने में क्या चीज पसंद थी इस बारे में भी खुलकर बताया।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Dec 02, 2025 11:01 am IST, Updated : Dec 02, 2025 11:07 am IST
Premanand Maharaj- India TV Hindi
Image Source : BHAJAN MARG प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj: आध्यात्मिक जगत में प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता काफी बढ़ती जा रही है। वे अपनी सरल भाषा, सहज शैली और प्रेम से भरे प्रवचनों से हर उम्र के लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि वे अध्यात्म से जुड़ी बड़ी से बड़ी बातों को भी बड़ी ही सरलता से समझा देते हैं। प्रेमानंद महाराज प्रतिदिन अपना दरबार भी लगाते हैं जिसे एकांतिक वार्तालाप के नाम से जाना जाता है। इस दरबार में भक्तजन महाराज जी से अपनी आध्यात्मिक और व्यक्तिगत शंकाओं का समाधान पाते हैं। इसी तरह कई भक्त महाराज जी से उनके जीवन से जुड़े प्रसंग भी जानना चाहते हैं। हाल ही में एकांतिक वार्तालाप के समय एक भक्त ने महाराज जी से पूछ लिया कि महाराज जी, आपको बचपन में सबसे ज्यादा क्या पसंद था? इस पर महाराज जी ने बड़ा ही रोचक जवाब दिया।

भक्त का सवाल - महाराज जी, आपको बचपन में सबसे ज्यादा क्या पसंद था?

प्रेमानंद जी महाराज मुस्कुराए और कहने लगे कि हमें मां सबसे प्रिय थीं। इसके अलावा खाने में मिठाई पसंद थी तो खेलने में कुश्ती और भगवान में शंकर जी सबसे प्रिय थे। इसके आगे भक्त ने महाराज जी से उनकी सेहत का भी पूछा जिस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान की कृपा से सेहत ठीक है।

महाराज जी ने बताया भगवान कृष्ण को कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

इसी वार्तालाप में एक भक्त ने पूछा कि महाराज जी भगवान कृष्ण को कैसे प्राप्त कर सकते हैं? जिस पर महाराज जी ने कहा कि सबसे पहले किसी संत की शरण में जाओ और उनका सदगुरु रूप में वरण करो। फिर उनके द्वारा बताई गई साधना करो। उनके अनुशासन में रहो। वो जैसा चाहें वैसे चलो। अगर ऐसा करते हो तो भगवत प्राप्ति अवश्य हो जाएगी। महाराज जी कहते हैं कि हमें जीवन में गाइड रूपी गुरु चाहिए जो हमारे मार्ग का भी परिचय बता सकें और भगवान का भी। 

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