प्रॉपइक्विटी का कहना है कि पारंपरिक रूप से अक्टूबर-दिसंबर का समय त्योहारों के चलते बिक्री और नए लॉन्च के लिए मजबूत माना जाता है। हालांकि, हालिया गिरावट इस बात को दर्शाती है कि बाजार में ‘प्रीमियमाइजेशन’ की तरफ रुझान बढ़ा है।
एनारॉक के अनुसार, दिल्ली-NCR के प्राइमरी हाउसिंग मार्केट में पिछले तीन सालों में मज़बूत डिमांड की वजह से कीमतों में 48-72 परसेंट की बढ़ोतरी देखी गई है।
यह लेटेस्ट रिपोर्ट बताती है कि भारत के प्रमुख शहरों में आवासीय बाजार लगातार मज़बूत हो रहा है। प्रॉपर्टी की कीमतों में यह स्थिर वृद्धि बताती है कि खरीदारों का भरोसा और निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी रियल एस्टेट सेक्टर में बरकरार है।
देश की राजधानी दिल्ली में घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन कुछ इलाके ऐसे हैं जहां कीमतें इतनी ऊंची हैं कि आम आदमी के लिए घर खरीदना लगभग नामुमकिन है। आइए जानते हैं कि दिल्ली के 5 सबसे महंगे रिहायशी इलाकों के बारे में।
शीर्ष सात शहरों में घरों की बिक्री जनवरी-मार्च, 2025 में 28 प्रतिशत घटकर 93,280 यूनिट्स रह गई, जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह आंकड़ा 1.30 लाख इकाई से अधिक था।
रियल एस्टेट मार्केट में जबरदस्त तेजी है। इसके चलते घरों की रिकॉर्ड बिक्री हो रही है। अगर आप भी घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो कुछ बातों को पहले जान लें।
यह संशोधन 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी होगा और इसके बाद कर निर्धारण वर्ष 2025-26 से लागू होगा। यह क्लेम वर्तमान में करदाता केवल कुछ शर्तों को पूरा करने पर ही कर सकेंगे।
एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल आवास बिक्री छह प्रतिशत घटकर 61,900 इकाई रह गई, जो 2023 में 65,625 इकाई थी
घरों की मांग लगातार कम हो रही है। इसकी वजह प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमत है। एंड यूजर्स चाह कर भी आशियान खरीद नहीं पा रहा है।
कीमतों में सालाना आधार पर सबसे अधिक 57 प्रतिशत की बढ़ोतरी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के आवासीय बाजार में देखी गई। इसमें कहा गया है कि बढ़ती निर्माण लागत के कारण आवासीय इकाइयों के मूल बिक्री कीमत में एडजस्टमेंट जरूरी हो गया है।
पिछले कुछ वर्षों में प्रमुख शहरों में लग्जरी संपत्तियों की बिक्री में उछाल आया है। राष्ट्रीय राजधानी, खासकर दक्षिण और मध्य दिल्ली में भी कई बड़ी संपत्ति सौदे हुए हैं। जनवरी-सितंबर में सात प्रमुख शहरों में 4 करोड़ रुपये और उससे अधिक कीमत वाले लग्जरी घरों की बिक्री में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
प्रॉपटाइगर का कहना है कि बिक्री और नए ऑफर दोनों में सालाना आधार पर गिरावट बढ़ती कीमतों के प्रति बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हम बाजार गतिविधि में एक स्वस्थ मंदी देख रहे हैं, जो एंड यूजर के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह स्थायी ग्रोथ लाता है।
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में आवास कीमतें 19,111 रुपये प्रति वर्ग फुट से छह प्रतिशत बढ़कर 20,275 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। पुणे में, आवासीय संपत्तियों की कीमतें अप्रैल-जून, 2024 में 13 प्रतिशत बढ़ीं। यह 9,656 रुपये प्रति वर्ग फुट रहीं।
प्रॉपर्टी खरीदने से कम से कम 15 दिन पहले खरीदार को सबरजिस्ट्रार के ऑफिस से एक सर्टिफिकेट प्राप्त करना चाहिए कि प्रॉपर्टी किसी भी तरीके के लोन या लोन के सभी मामलों से मुक्त है।
Property News : उच्च तुलनात्मक आधार के कारण आवास की मांग और कीमत में चालू वित्त वर्ष में नरमी आ सकती है। वित्त वर्ष 2023-24 के आखिर में कीमतें सालाना आधार पर 22 फीसदी बढ़ी हैं।
घरों की बिक्री में मात्रा और मूल्य, दोनों लिहाज से बढ़ोतरी समग्र अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। मूल्य के लिहाज से आवास बिक्री इस साल जनवरी-मार्च में 1,10,880 करोड़ रुपये रही।
मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में 289 एकड़ में फैले 24 अलग-अलग भूमि सौदे हुए, जिनकी कीमत 11,222 करोड़ रुपये थी। चेन्नई में, आठ अलग-अलग सौदों में 1,220 करोड़ रुपये में 209 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया।
Property Rate in Gurugram : इस साल प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी उछाल दर्ज हुई है। साल 2024 में भी प्रॉपर्टी मार्केट में यह तेजी जारी रहने के संकेत हैं। गुरुग्राम में प्रीमियम यानी महंगे घरों की कीमत में पिछले एक साल में 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है।
दिल्ली-एनसीआर में, बिना बिकी आवास की संख्या (Unsold housing stock) 40,211 यूनिट से 7 प्रतिशत घटकर 37,356 यूनिट हो गई।
दिल्ली और एनसीआर में अब गुरुग्राम नहीं बल्कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा घर खरीदारों की पहली पसंद बन गया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बीते 3 महीने यानि अप्रैल से जून 2018 के दौरान मकानों की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गयी, जबकि गुड़गांव में बिक्री घटी है। संपत्ति परामर्शक वेबसाइट प्रॉपटाइगर के अनुसार, तिमाही के दौरान नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घरों की बिक्री 51 प्रतिशत बढ़कर 5,715 इकाई हो गयी, जबकि गुड़गांव में यह 52 प्रतिशत घटकर 1,922 इकाई रही
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