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मथुरा कृष्ण जन्मभूमि के पास डिमोलिशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे याचिकाकर्ता, 16 अगस्त को होगी सुनवाई

 Edited By: Adarsh Pandey
 Published : Aug 15, 2023 06:54 am IST,  Updated : Aug 15, 2023 07:21 am IST

उत्तर प्रदेश में मथुरा रेलवे द्वारा कृष्ण जन्मभूमि के पास कुछ जमीनों पर बने घरों का ध्वस्तिकरण किया जा रहा है। रेलवे की इस कार्रवाई का विरोध कर रहे लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : SOCIAL MEDIA

उत्तर प्रदेश: मथुरा में रेलवे द्वारा कृष्ण जन्मभूमि के पास हो रहे डिमोलिशन को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी जिस पर सुनवाई के लिए कोर्ट कल सहमत हो गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को यह आश्वासन दिया कि वे 16 अगस्त को मामले की सुनवाई करेंगे।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांतो चंद्र सेन ने पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक वकील की गोली मारकर हत्या होने के कारण उत्तर प्रदेश में अदालतें बंद कर दी गई हैं, इसलिए इस विषय पर तत्काल सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि अधिकारियों ने 9 अगस्त से डिमोलिशन शुरू कर दिया है। उस जगह पर सन् 1800 से लोग रह रहे हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या कहा?

उन्होंने मथुरा रेलवे अधिकारियों द्वारा ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने सिविल कोर्ट सीनियर डिवीजन, मथुरा के समक्ष एक सिविल मुकदमा दायर किया था और रेलवे प्राधिकरण के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की थी मगर इसी दौरान 9 अगस्त 2023 को डिमोलिशन का काम शुरू हो गया। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि, इसे अगले ही दिन 10 अगस्त को चुनौती दी गई।

रेलवे ने याचिकाकर्ताओं के घर तोड़ने की प्रक्रिया शूरू कर दी है

बता दें रेलवे के वकील ने 10 अगस्त को कहा था कि उनके पास डिमोलिशन के लिए कोई निर्देश नहीं है और वो सिविल कोर्ट के सामने निर्देश के साथ आएंगे। इसपर याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि एक वकील की गोली लगने की घटना के कारण बार काउंसिल द्वारा पारित एक प्रस्ताव के अनुसार इलाहाबाद में सभी अदालती कार्यवाही निलंबित कर दी गई है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए रेलवे प्राधिकरण ने मनमाने तरीके से याचिकाकर्ताओं के घर को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कोर्ट के सामने दायर इस याचिका में पूरी कार्रवाई को अवैध, मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताया है।

(इनपुट:एएनआई)

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