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Video: जब गोमूत्र से हाथ और मुंह धोने लगी ये टूरिस्ट, गिनाए इतने फायदे ​कि सुनकर यकीन नहीं होगा

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Dec 27, 2025 04:49 pm IST,  Updated : Dec 27, 2025 04:49 pm IST

Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन​ दिनों काफी वायरल हो रहा है। इसमें एक टूरिस्ट गाय के मूत्र से हाथ और मुंह धोते हुए दिखाई दे रही है।

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गोमूत्र से हाथ-मुंह धेाती महिला। Image Source : IG/@GIZASTRUTHTRAVEL

Viral Video: दक्षिण सूडान की गिनती दुनिया के सबसे कम देखे जाने वाले देशों में की जाती है। ये देश अपनी अनोखी और प्राचीन परंपराओं के लिए काफी जाना जाता है। यहां पर मुंडारी जनजाति रहती है जिसकी प्रथा बेहद अजीब है। यहां पर इस जनजाति के लोग दैनिक जीवन में गाय के मूत्र का उपयोग करते हैं। दावा है कि, यहां पर गोमूत्र प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, कीट निवारक, सनस्क्रीन और यहां तक ​​कि बालों के रंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हाल ही में एक टूरिस्ट ने यहां का दौरा किया और गाय के मूत्र से अपने हाथ और चेहरा धोकर इस प्रथा को आजमाया और अपना अनुभव शेयर किया। 

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो 

इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @gizastruthtravel नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो में गीज़ा बताती हें कि, गोमूत्र से मच्छर जनित बीमारियों से बचाव होता है। स्थानीय जनजाति के लिए गाय के मूत्र से स्नान करना केवल एक रस्म नहीं है, बल्कि गर्म और कीड़े-मकोड़ों से भरे वातावरण में सुरक्षित और आरामदायक रहने का एक तरीका है। बाहरी लोगों को यह भले ही अजीब लगे, लेकिन यह विधि पीढ़ियों से उनकी संस्कृति का हिस्सा रही है। गीज़ा ने कहा, 'दक्षिण सूडान में गाय का कोई भी हिस्सा बर्बाद नहीं होता। उसके मूत्र का इस्तेमाल प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और कीटनाशक के रूप में किया जाता है। मुझे मलेरिया नहीं हुआ, इसलिए लगता है कि यह कारगर है। अमोनिया की वजह से ही मेरे बाल नारंगी रंग के हो गए हैं।' कैप्शन में यात्री ने बताया, 'इन लोगों का जीवन उनके मवेशियों के इर्द-गिर्द घूमता है, यहां तक ​​कि उनके खास नारंगी बाल भी उन्हीं से आते हैं। गाय के मूत्र से नहाना सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन दक्षिण सूडान की कठोर परिस्थितियों में – चिलचिलाती धूप और काटने वाले कीड़ों के झुंड के बीच यह एक अनोखा तरीका है। अमोनिया एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक, कीटनाशक और यहां तक ​​कि ब्लीचिंग एजेंट के रूप में भी काम करता है।

यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, 'जब उसने इसे आपके चेहरे पर लगाया तो वह आदमी थोड़ा भ्रमित और घबराया हुआ सा लग रहा था।' दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'अगर यह भारत होता, तो लोग हिंदुओं को लगातार कोस रहे होते, भले ही हममें से अधिकांश लोग इस धर्म का पालन भी नहीं करते हैं।' तीसरे ने लिखा कि, 'जानवरों पर हमें अपना जीवन या शरीर देने का कोई दायित्व नहीं है। शाकाहारी बनने के लिए यह एक अनुस्मारक है।' चौथे यूजर ने लिखा कि, 'अगर कल कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए और हमारे पास आधुनिक तकनीक न हो, तो इस तरह की जनजातियां ही जीवित रहेंगी और समाज का पुनर्निर्माण करेंगी। मेरे जैसे और पश्चिमी दुनिया के अधिकांश लोग भूख, बीमारी, भुखमरी आदि से मर जाएंगे।' पांचवे यूजर ने लिखा कि, 'हे भगवान! जब मैं छोटी थी, मेरी मोरक्कन दादी ने मुझे बताया था कि इसका इस्तेमाल त्वचा पर चकत्ते, मुंहासे और त्वचा की अन्य समस्याओं के लिए किया जाता था।' वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि, 'कभी-कभी मुझे लगता है, शिक्षा महत्वपूर्ण क्यों है?'

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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